मेरी आवाज़...
Thursday, September 10
बेटी
बेटी चांद के रूप में पैदा होती है,
उसे सूरज सरीखा ताकत दो।
जो आंख उठे अंगारों सा
तो बेटी कहर सा व्यापत हो।
-दीपक
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