Tuesday, June 21

SBI ASSOCIATES पीओ

SBI ASSOCIATES पीओ

किसी भी देश के आर्थिक विकास में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका अहम है, इसीलिए यह सेक्टर अरसे से लोगों को लुभाता रहा है। जो अभ्यर्थी भारतीय स्टेट बैंक पीओ के लिए आवेदन नहीं कर सके, उनके लिए एसबीआई की सहयोगी बैंकों ने प्रोबेशनरी ऑफिसर के पांच हजार पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किये हैं। देश के आर्थिक विकास में महती भूमिका निभाने के इच्छुक युवाओं को एसबीआई एसोसिएट बैंक एक अवसर प्रदान कर रहा है। करियर के लिहाज से यह सुरक्षित विकल्प तो है ही, बैंक मैनेजर के रूप में भी आर्थिक रूप से पिछड़े तबके को संपन्न बनाने में भी योगदान कर सामाजिक दायित्वों का निर्वहन भी किया जा सकता है

आवेदन करने की आखिरी तारिख : 25 जून परीक्षा : 7 अगस्त 2011 को प्रस्तावित

चयन प्रक्रिया

चयन प्रक्रिया दो चरण में है। पहले चरण में लिखित परीक्षा और दूसरे चरण में ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू है। पहले चरण में उत्तीर्ण होने के बाद ही दूसरे चरण के लिए बुलाया जाएगा। दोनों चरणों में उत्तीर्णाक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की कैटेगरी के अनुसार मेधा सूची बनाई जाएगी। मेधा अंकों के आधार पर एबीआई के एसोसिएट बैंकों में नियुक्ति दी जाएगी।

पहला चरण : लिखित परीक्षा

ढाई सौ अंकों की संयुक्त रूप से लिखित परीक्षा के लिए तीन घंटे का समय निर्धारित किया गया है। इसमें दो सौ अंकों के ऑब्जेक्टिव और पचास अंकों के डिसक्रिप्टिव टाइप के प्रश्न पूछे जाएंगे। ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्नों में टेस्ट ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज के तहत इंग्लिश ग्रामर, शब्द भंडार और कॉम्प्रिहेंशन के अलावा टेस्ट ऑफ जनरल अवेयरनेस के तहत सामान्य ज्ञान, मार्केटिंग और कम्प्यूटर्स, डाटा एनालिसिस एंड इंटरप्रिटेशन, रीजनिंग के प्रश्न होंगे। इसके लिए दो घंटे का समय निर्धारित है।डिसक्रिप्टिव टाइप प्रश्नों में इं ग्लिश लैंग्वेज को परखा जाएगा। इसके तहत कॉम्प्रिहेंशन, शॉर्ट प्रेसी (संक्षेपण), लेटर राइटिंग और निबंध से सं बंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके लिए एक घंटे का समय निर्धारित है। ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा में कम से कम 40 फीसद यानी 80 अंक लाना जरूरी है। जो अभ्यर्थी इससे कम अंक पाएंगे, उनकी डिसक्रिप्टिव परीक्षा की कॉपी की जांच नहीं की जाएगी। डिसक्रिप्टिव परीक्षा में भी उत्तीर्ण होने के लिए कम से कम 40 फीसद अंक लाना अनिवार्य है। एससी, एसटी और विकलांगों के लिए पां च फीसद की रियायत दी गई है। लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मेधावी सूची बनाई जाती है। उसके आधार पर प्रत्येक कोटे के रिक्त पदों की सं ख्या के तीन गुणो अभ्यर्थि यों को ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है।

दूसरा चरण : ग्रु प डिस्कशन और इंटरव्यू

ग्रुप डिस्कशन यानी सामूहिक वार्तालाप के माध्यम से किसी एक टॉपिक पर अभ्यर्थी के विचार जानने की कोशिश की जाती है। इसके माध्यम से बोलने का तरीका, शारीरिक हाव-भाव को परखा जाता है। इसमें चार या पांच अभ्यर्थियों का ग्रुप होता है। ग्रुप डिस्कशन में बेहतर करने के लिए जरूरी है कि पहले विषय को अच्छी तरह समझें। ग्रुप के अन्य अभ्यर्थी जो उत्तर दे रहे हैं, उससे अलग और तार्किक उत्तर देने की कोशिश करें। विषय भटकाव से बचें। इंटरव्यू के माध्यम से अभ्यर्थी के व्यक्तित्व को परखा जाता है। ग्रुप डिस्कशन के लिए बीस और इंटरव्यू के लिए तीस अंक निर्धारित किये गये हैं। पचास अंकों का ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को न्यूनतम 40 फीसद अंक लाना अनिवार्य है जबकि एससी, एसटी और विकलांगों के लिए 35 फीसद।

रणनीति

  • प्रश्नों के पैटर्न को समझने के लिए बैंकों में पूछे गए दस वर्षो के प्रश्नों को हल करने की कोशिश करें।
  • प्रत्येक प्रश्नों की प्रकृति अलग- अलग होती है, अभ्यास करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है। ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्नों को तेजी और शुद्धता से हल करना होता है। इसके लिए नियमित अभ्यास जरूरी है।
  • ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा के सभी खंडों पर बराबर ध्यान देना जरूरी है।
  • पढ़ने के लिए समय को सामान्य ज्ञान, विज्ञान और मैथ के लिए अलग-अलग भागों में बांटकर रुटीन बनाएं।
  • लिखित परीक्षा में सामान्य ज्ञान और दैनिक विज्ञान की तैयारी के लिए प्रतियोगिता पत्रिकाओं को नियमित पढ़ें।
  • अभ्यर्थी अगर बारहवीं तक की एनसीईआरटी की पुस्तकों को रिवाइज कर ले तो सामान्य ज्ञान और विज्ञान के प्रश्नों को हल करना काफी सुविधाजनक हो जाएगा।
  • रीजनिंग और न्यूमेरिकल के लिए विसनीय पुस्तक पढ़ने के साथ-साथ पत्रिकाओं की मदद से प्रैक्टिस सेट बनाएं।
  • अंग्रेजी की तैयारी के लिए ग्रामर, सिनोनिम्स और एंटोनिम्स पढ़ना जरूरी है।

दीपक राजा

Sunday, June 19

खेल के मैदान में खेलती हुई नजर आयेगी अरुणिमा

अरुणिमा सिन्हा को लोग भूल चुके होंगे. याद दिला दें की वही अरुणिमा जिसे चलती ट्रेन से बदमाशों ने फ़ेंक दिया था. इस कारन वो विकलांग हो गयी थी. उसे जल्द ही एम्स से छुट्टी मिल जायेगी. केंद्रीय खेल मंत्री अजय माकन ने कहा है स्ट्रेचर से अरुणिमा को दिल्ली लेट समय यूपी से वादा किया था कि उसे खेल के मैदान में उतरेंगे. वह जल्द खेल के मैदान में खेलती हुई दिखेंगीं.

कवि पाश ने लिखा है 'सबसे खतरनाक होता है/ हमारे सपनों का मर जाना/ सबसे खतरनाक वो घड़ी होती है/ आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो/ आपकी नजरों में रूकी होती है।" हालांकि हादसे में पैर कटने के बाद भी, वॉलीबाल में अपना भविष्य देख रही अरुणिमा सिन्हा उर्फ सोनू का सपना तो नहीं मरा लेकिन सिस्टम उसके अरमानों को रौंदने की बहुत कोशिश की है. दिल दहला देने वाली हादसे के बावजूद तवरित करवाई के बजाये हादसे को खुदकुशी का रूप देने की कुचेष्टा कर अरुणिमा को परेशान करने की कोशिश हुई थी.

हां, मीडिया ने जब सिस्टम पर चौतरफा हमला बोला तब सरकारें सक्रिय हुई थीं और मदद के नाम पर सतही दावे होने लगा था. केन्द्रीय खेल मंत्री अजय माकन ने महज 25 हजार की आर्थिक मदद की पेशकश की. मीडिया में सरकार की किरकिरी हुई, तब जाकर उन्हें घटना की भयावहता का अंदाजा लगा और उन्होंने रकम बढ़ाई। अब एम्स के ट्रामा सेंटर का खर्च केंद्र सरकार उठा रही है।

क्रिकेट को धर्म समझने वाले देश में अरुणिमा ने वालीबॉल में सपना देखा था। लखनऊ से करीब 250 किमी दूर अम्बेडकरनगर जिले के शहजादपुर कस्बे के खतराना मोहल्ले की लड़की ने जो ख्बाव देखा, यह उसकी जीवटता थी। सात साल की उम्र में फौजी पिता का साया सर से उठ जाने के बाद पनपी जीवटता ही अरुणिमा की ताकत है। इसी ताकत के बल पर समाज शास्त्र में एमए और फिर एलएलबी की पढ़ाई कर रही अरुणिमा ने मौत को मात दी. धीरे धीरे अब अपने आपको फीर से खेल के लिए तैयार कर रही है.

आत्मनिर्भर होने के लिए अरुणिमा ने सीआईएसएफ में नौकरी के लिए आवेदन किया। उसका फिजीकल टेस्ट आठ मई को नोएडा में होना था। इसी सिलसिले में अरुणिमा 11 अप्रैल को दिल्ली के लिए लखनऊ से पदमावत एक्सप्रेस में सवार हुई। ट्रेन बरेली से खुली और ढाई बजे रात चेनहटी के पास लूट की वारदात को विरोध करने पर चार बदमाशों ने उसे ट्रेन से बाहर फेंक दिया। दुर्भाग्यवश, दूसरी पटरी पर अन्य ट्रेन आ रही थी। उससे अरुणिमा का बायां पैर कट गया। सुबह होने तक ट्रेनें पटरी पर दौड़ती रहीं और वह लाचार बेबस तड़पती रही। आसपास के गांववालों ने उसे पटरी पर पड़ा देखा। आनन-फानन में उसे टेम्पो से बरेली के जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां उसकी तीन दिन इलाज चला, यहीं बाएं पैर का ऑपरेशन हुआ। संक्रमण होने पर लखनऊ के मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

राष्ट्रीय एथलीट के साथ हादसा की खबर सुर्खियां बनने पर रेल मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय ने यूपी सरकार और जीआरपी से रिपोर्ट तलब की। रेलवे सुरक्षा के सवाल पर रेलवे प्रवक्ता ने दो टूक शब्दों में कहा कि रोजाना देश में ग्यारह हजार ट्रेनें चलती है। उसमें से 3500 ट्रेनों को चिन्हित करके पुलिस एस्कॉर्ट करती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक ट्रेन में पुलिस की तैनाती संभव नहीं है। गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाली रेलवे अपनी खाल बचाने की कोशिश में अरुणिमा के हादसे को खुदकुशी करने की कोशिश करार देने में जुटी. यह निर्लज्जता की हद है।

गंभीर हादसे के बाद अरुणिमा को महाराणा प्रताप सिह जिला अस्पताल बरेली से एम्बुलेंस द्वारा छत्रपति साहू महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी (किंग जॉर्ज उर्फ लखनऊ मेडिकल कॉलेज) लाया गया। यहां घोर लापरवाही देखने को मिली। घायल एथलीट को भर्ती कराने की सूचना पहले देने के बावजूद, मौके पर कोई भी सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं था। इमरजेंसी मेडिकल अफसर डा. शोभनाथ सोनकर ने आनन-फानन में अरुणिमा को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया। आधा घंटे के बाद उसे आर्थोपेडिक विभाग के महिला वार्ड के बेड नं. नौ में शिफ्ट किया गया। संक्रमण से कराह रही अरुणिमा को भर्ती कराने से पहले यहां झाड़ू-पोछा किया गया और बिस्तर ठीक किए गए। संक्रमण बढ़ने पर अरुणिमा के पैर को थोड़ा आगे करके दोबारा काटा गया।

राजनीतिक रोटी सेंकने के चक्कर में उत्तर प्रदेश की कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा के हस्तक्षेप के बाद केंद्रीय खेल मंत्री अजय माकन एयर एम्बुलेंस से अरुणिमा को दिल्ली एम्स के ट्रामा सेंटर ले आए। अगर रीता बहुगुणा हस्तक्षेप नहीं होता, अरुणिमा रात के बजाए सुबह ही एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती हो जाती, क्योंकि तब तक उत्तर प्रदेश सरकार ने अरुणिमा को एम्स लाने की पूरी तैयारी कर चुकी थी। दो महीने ट्रामा सेंटर भर्ती होने के बाद से अरुणिमा में अब काफी सुधार है। एम्स ट्रामा सेंटर के हेड डा. एमसी मिश्रा ने कहा, 'अरुणिमा काफी हिम्मत और पक्के इरादे वाली लड़की है, उसे इस घटना से उबरने में थोडा और वक्त लगेगा'।

अपनी आग को जिंदा रखना, कितना मुश्किल है, पत्थर बीच में आइना रखना कितना मुश्किल है। इस बात को अरुणिमा अच्छी तरह समझती है। हादसे के बाद उन्होंने कहा, 'पैर चला गया तो क्या हुआ, सब कुछ पैर से ही तो नहीं होता। अगर एक क्षेत्र में नहीं कर पाई तो दूसरे क्षेत्र में देश के लिए काम करूंगी"। उन्होंने कहा कि हिम्मत हो तो आसमान को छुआ जा सकता है।

वालीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिंहा उर्फ सोनू फिर से खेलेंगी, यह तो तय है. कितना खेल पाएंगी, यह प्रश्न भविष्य के गर्त में है। करियर दांव पर है। वह इस हालत में पहुंची, उसका दोषी है हमारा तंत्र और इसे चलाने वाले लोग, एक हद तक हमारा कायर समाज भी। अप्रैल 11 की मनहूस रात ने अरुणिमा के साथ गंदा खेल खेला ही। दिन के उजाले में तंत्र और तंत्र चलाने वाले लोग अरुणिमा के साथ जो व्यवहार किया वो कम दुखदाई नहीं है।
अरुणिमा को जानने का हक है कि क्यों उसके इलाज में देरी हुई, क्यों उसकी भावनाओं से खेला गया? क्यों गंभीर मसले पर सियासी नौटंकी हुई? इन सवालों का जवाब मिले बगैर न जाने कितनी अरुणिमा के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहेगा और हम चुपचाप बने रहेंगे तमाशबीन ...।

Tuesday, June 7

एसएससी स्नातक स्तरीय परीक्षा


कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) सेंट्रल पुलिस ऑग्रेनाइजेशन में सब इंस्पेक्टर, सीआईएसएफ में एसिस्टेंट सब इंस्पेक्टर और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में इंटेलिजेंस अफसर के लिए 1882 पदों की रिक्तियां आमंत्रित की हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 24 जून है जबकि परीक्षा 28 अगस्त को है

अर्हताएं

शैक्षणिक योग्यता : अभ्यर्थी को किसी भी मान्यता प्राप्त विविद्यालय से किसी भी विषय से कम से कम स्नातक या इसके समकक्ष शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए।

उम्र : सीआईएसएफ और सीपीओ के लिए इच्छुक उम्मीदवार की उम्र 24 जून को कम से कम 20 साल होनी चाहिए लेकिन 25 साल से अधिक नहीं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में इंटेलिजेंस अफसर बनने के लिए उम्मीदवार की उम्र 20 से 27 साल के बीच होनी चाहिए।

लिखित परीक्षा

लिखित परीक्षा 28 अगस्त को है। इसी दिन दो-दो घंटों के दो सत्रों में दो प्रश्न पत्र होंगे। सभी प्रश्न वस्तुनिष्ठ होंगे और प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देने के लिए चार विकल्प दिए जाएंगे।

पहले पेपर को चार भागों में बांटा गया है - जेनरल इंटेलिजेंस और रीजनिंग, जेनरल नॉलेज और जेनरल अवेयरनेस, न्यूमेरिकल एप्टीटय़ूट और इंग्लिश कम्प्रेहेंशन। पहले भाग में समानता और अंतर, समस्या का समाधान, मूल्यांकन, निर्णय क्षमता, चित्रों का वर्गीकरण, जैसे वर्बल और कोडिंग-डिकोडिंग, वाक्य निष्कर्ष आदि के नॉन-वर्बल प्रश्न पूछे जाएंगे। दूसरे भाग में समसामायिक घटनाओं के साथ देश-विदेश के खेल, इतिहास, संस्कृति भूगो ल, राजनीतिक, साइंटिफिक रिसर्च और भारतीय संविधान आदि संबंधी प्रश्न पूछे जाएंगे। तीसरे भाग में समय और दूरी, नम्बर सिस्टम, दशमलव पद्धति, प्रतिशत, अनुपात-समानुपात, औसत, ब्याज, लाभ-हानि पर आधारित प्रश्न होंगे और चौथे भाग में अंग्रेजी की समझ को परखने के लिए प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक भाग पचास अंकों का है और इसमें 50 प्रश्न होंगे।

दूसरा पेपर अंग्रेजी भाषा और कम्प्रेहेंशन का है। यह दो सौ अंकों का है और इसमें दो सौ प्रश्न पूछे जाएंगे। चार विकल्पों में से प्रश्नों का उत्तर ध्यानपूर्वक चयन करना होगा क्योंकि चार गलत उत्तर देने पर एक अंक काट लिया जाएगा।

महत्वपूर्ण बात

  • प्रथम प्रश्न पत्र के प्रत्येक भाग में उत्तीर्ण होने के लिए एसएससी ने सभी वर्ग के लिए एक न्यूनतम पासिंग मार्क निर्धारित किया है।
  • पहले पेपर में न्यूनतम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को शारीरिक परीक्षण या मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा। इसके लिए कोई अंक निर्धारित नहीं है, लेकिन इसमें क्वालिफाई होना जरूरी है।
  • दूसरे पेपर की जांच उन्हीं उम्मीदवारों का होगा जो शारीरिक परीक्षण/मेडिकल टेस्ट में सफल होंगे।
  • दूसरे पेपर की जांच के बाद दोनों पेपर के प्राप्तांक को मिलाकर कैटेगरी वाइज मेधावी सूची बनाई जाएगी।
  • मेधावी सूची के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा।
  • साक्षात्कार के बाद कैटेगरी वाइज अभ्यर्थियों की मेधावी सूची बनाई जाएगी।
  • चयनित अभ्यर्थियों को उनके द्वारा दिए गए विकल्प और मेधावी सूची के आधार पर पोस्ट एलॉट किए जाएंगे।

रणनीति

  • परीक्षा में सफल होने के लिए सबसे पहले सिलेबस को समझना जरूरी है।
  • लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्र महत्वपूर्ण हैं। किसी को भी कमतर आंकना ठीक नहीं है।
  • प्रश्नों के स्तर को समझने के लिए एसएससी के पिछले वर्ष के प्रश्नों को देखना जरूरी है। इससे ‘टू द पाइंट’ तैयारी करने में सहायता मिलेगी।
  • निर्धारित समय सीमा में सभी प्रश्नों का उत्तर देना आसान नहीं है। इसके लिए निरंतर अभ्यास करने की आवश्यकता है।
  • शारीरिक परीक्षण के लिए भले ही अंक निर्धारित नहीं है लेकिन चयन प्रक्रिया में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • समसामायिक घटनाओं की जानकारी को अपडेट रखने के लिए राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्र के अलावा प्रतियोगिता पत्रिकाओं की नियमित पढ़ाई जरूरी है।
  • पढ़ाई करते समय अपने साथ में नोटबुक रखना चाहिए और जहां जो भी तथ्य महत्वपूर्ण लगे, उसे नोटबुक में नोट करना चाहिए और उसे दिनभर में तीन से चार बार पढ़ना चाहिए।
  • बारहवीं तक की एनसीईआरटी की पुस्तकों को अगर रिवाइज कर लिया जाए तो सामान्य ज्ञान और विज्ञान के प्रश्नों को हल करना काफी हद तक सुविधाजनक हो जाएगा।
  • अंग्रेजी की तैयारी के लिए नियमित अंग्रेजी अखबार पढ़नी चाहिए और अंग्रेजी के शब्द भंडार बढ़ाने पर नियमित ध्यान देने की जरूरत है।
  • न्यूमेरिकल के सवालों में ज्यादातर अंकगणित के प्रश्न होंगे, कम समय में अधिक प्रश्नों का हल करने के लिए आरएस अग्रवाल की पुस्तक अंकगणित की सहायता ली जा सकती है।