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Tuesday, November 27

बीमा में बेहतर चांस


अगर आपमें समाज सेवा की भावना है और करियर को बेहतर बनाना चाहते हैं तो बीमा सेक्टर बेहतर विकल्प के रूप में आपके सामने हैं। भारतीय जीवन बीमा (एलआईसी) अलग-अलग जोन के लिए अप्रैंटिस डेवलपमेंट ऑफीसर (एडीओ) के पद कर कुल 5,201 लोगों को भर्ती करने जा रहा है 

परीक्षा की तिथि : 2 और 3 फरवरी, 2013
 
योग्यता और उम्र 
उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान या विविद्यालय से स्नातक या इसके समकक्ष डिग्री हो। उम्मीदवार की उम्र एक नवम्बर 2012 के हिसाब से 21 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। उम्र में छूट और आरक्षण केंद्र सरकार के नियमानुसार मिलेगा।

चयन 
अप्रैंटिस डेवलपमेंट ऑफीसर (एडीओ) की चयन प्रक्रिया दो चरणों में है। पहला चरण है लिखित परीक्षा का है, जो दो और तीन फरवरी 2013 को होगी। इसमें सफल होने के बाद साक्षात्कार होगा। साक्षात्कार में सफल होने वाले उम्मीदवार को मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा।

लिखित परीक्षा ऑनलाइन है। इसमें दो सौ प्रश्न होंगे। प्रत्येक प्रश्न के चार उत्तर होंगे। सही उत्तर का चयन करना है। प्रत्येक प्रश्न के लिए एक अंक तय है यानी लिखित परीक्षा दो सौ अंकों का है। इसके दो हिस्से हैं। पहले में रीजनिंग और न्यूमेरिकल संबंधी प्रश्न होंगे जबकि दूसरे में जनरल नॉलेज, करंट अफेयर, इंग्लिश ग्रामर और इंग्लिश वोकैब्लयेरी संबंधी प्रश्न होंगे। दोनों हिस्सों में अलग-अलग न्यूनतम क्वालीफाइंग मार्क्‍स लाने और फिर दोनों को मिलाकर क्वालीफाइंग मार्क्‍स लाने अनिवार्य हैं। क्वालीफाइंग मार्क्‍स कितना हो, इसे एलआईसी आवेदनों की संख्या के आधार पर तय करेगी।

Thursday, November 15

आईटीबीपी : रक्षा व रोमांच से जुड़ी जीविका




 अभी अक्टूबर में इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) का 50वां स्थापना दिवस मनाया गया। यह संख्या बल के आधार पर देश की सबसे छोटी फोर्स है। इसका गठन 24 अक्टूबर 1962 को भारत-चीन युद्ध (1962) के बाद किया गया था। इसका गठन मुख्य रूप से भारत- चीन सीमा पर सीमापार से अवांछनीय घु सपैठ, तस्करी को रोकना, सीमा की निगरानी करना, देश की उत्तरी सीमा पर अतिक्रमण का पता लगाकर उसकी रोकथाम करने के अलावा स्थानीय लोगों में सुरक्षा भावना मजबूत करना है। लद्दाख के कराकोरम र्दे से लेकर अरुणाचल प्रदेश के दिफू ला तक की तीन हजार चार सौ अठ्ठासी किमी लंबी सीमा की रक्षा की जिम्मेदारी आईटीबीपी के पास है। भारत-चीन पश्चिमी, मध्य और पूर्वी सेक्टरों में नौ हजार से अट्ठारह हजार पांच सौ फुट की ऊंचाई पर तैनात आईटीबीपी के जवानों को शून्य से चालीस डिग्री सेंटीग्रेट नीचे के तापमान पर भी डय़ूटी निभानी पड़ती है। बाहरी आक्रमणों से देश की सीमाओं की सुरक्षा, सीमाओं पर घुसपैठ रोकने की जिम्मेदारी डिफेंस सर्विसेज की होती है।

यदि आप देश की रक्षा में अपना सहयोग देना चाहते हैं तो आप इंडो -तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) से जुड़ सकते हैं। इस पुलिस फोर्स में सहायक पुलिस निरीक्षक (स्टेनोग्राफर) के पद पर कार्य करने की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू है जिसकी आखिरी तारीख 14 दिसम्बर 2012 है। अभ्यर्थी की उम्र 18 से 25 वर्ष होनी चाहिए

योग्यता
इच्छुक उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय से इंटरमीडिएट का सर्टिफिकेट गहोना चाहिए। इसके अलावा, उम्मीदवार को हिन्दी या अंग्रेजी भाषा में शॉर्टहेंड राइटिंग के साथ- साथ कम्प्यूटर पर टाइपिंग आना जरूरी है। उम्मीदवार से कम्प्यूटर के बेसिक नॉलेज की अपेक्षा की जाती है।

चयन-प्रक्रिया 
 चयन-प्रक्रिया तीन चरणों में है। पहले चरण में उम्मीदवार की शारीरिक दक्षता और प्रमाणपत्रों की जांच होगी। दूसरे चरण में लिखित परीक्षा और तीसरे चरण में स्किल टेस्ट के तहत शॉर्टहेंड और टाइपिंग स्पीड को परखा जाता है। इसके बाद, मेरिट के आधार पर सफल उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होती है, जिन्हें एएसआई (स्टेनो) के पद में रखा जाएगा।

Tuesday, November 6

फिक्की से लें बौद्धिक संपदा की डिग्री


वर्तमान दौर में बौद्धिक संपदा का संरक्षण दुनिया के तमाम देशों के लिए चुनौती बना हुआ है। बौद्धिक संपदा कानून के दायरे में मालिकों की विभिन्न अमूर्त संपत्तियों, मसलन संगीत, साहित्य, कला, विचार, खोज व आविष्कार, शब्द, वाक्यांश, प्रतीक और डिजाइन को लेकर विशेष अधिकार हैं। सामान्य तौर पर बौद्धिक संपदा में शामिल हैं, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, पेटेंट, औद्योगिक डिजाइन आदि। यह ऐसा फील्ड है जहां इसके विशेषज्ञों की मांग काफी है और करियर की असीम संभावनाएं हैं

इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (आईपीआर) प्रोफेशनल बनकर करियर संवारने के इच्छुक लोगों के लिए फिक्की तीन ऑनलाइन और एक ऑफलाइन सर्टिफिकेट कोर्स ऑग्रेनाइज कराता है। बौद्धिक संपदा पर कानून और अभ्यास में सर्टिफिकेट कोर्स में दाखिले के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 16 नवम्बर 2012 है। आवे दन की तिथि खत्म होने के तीन दिन बाद 19 नवम्बर से 28 दिसम्बर 2012 तक इसकी पढ़ाई होगी। कक्षाएं सोमवार से शुक्रवार शाम साढ़े छह बजे से लेकर शाम साढ़े आठ बजे तक फिक्की मुख्यालय परिसर में लगेगी। फिक्की यह कोर्स ग्लोबल इंस्टीटय़ूट ऑफ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (जीआईआईपी) के सहयोग से चला रहा है।

योग्यता
तकनीकी, बायोटेक, इंजीनियरिंग, फाम्रेसी, विज्ञान आदि में कम से कम स्नातक होना अनिवार्य है। यह कोर्स इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रबंधन स्कूल के फैकल्टी के अलावा आईपी एटॉर्नी एवं आईपी प्रोफेशनल सहित सीए आदि के छात्रों के करियर के लिए भी उपयोगी है।

चयन प्रक्रिया
नामांकन की प्रक्रिया ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की तर्ज पर है। इस कोर्स में सौ सीटें हैं। इसमें आवेदन करने के लिए सबसे पहले ‘फिक्की’ की संबंधित वेबसाइट से फॉर्म डाउनलोड करके भरें। भरे हुए आवेदन प्रपत्र के साथ, बायोडाटा और कोर्स फीस की डिमांड ड्राफ्ट और एक पासपोर्ट साइज की फोटो ‘फिक्की’ के मुख्यालय फिक्की हाउस, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली- 110 001 में जमा करें। डिमांड ड्राफ्ट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए अठ्ठाइस हजार नब्बे रुपए और छात्रों के लिए सोलह हजार आठ सौ चौवन रुपए है। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, फिक्की) व्यापारिक संगठनों का संघ है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। इसकी स्थापना 1927 में महात्मा गांधी की सलाह पर घनश्याम दास बिड़ला और पुरुषोत्तम ठक्कर द्वारा की गई थी।

कोर्स
  • ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स ऑन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) 
  • ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स ऑन कंपीटिशन लॉ एंड आईपीआर 
  • फिक्की-जीआईआईपी सर्टिफिकेट को र्स ऑन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) लॉज एंड प्रैक्टिस 
  • ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स ऑन आईपीआर एंड फार्माच्युटिकल आर एंड डी (सीसीआईपीआर)




Tuesday, October 30

बेहतर विकल्प बन रहा वन प्रबंधन

पृथ्वी की कु ल भूमि क्षेत्र का 30 फीसद हिस्सा वनों से आच्छादित है लेकिन शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण पेड़ों की लगातार कटाई जारी है। ऐसे में, पर्यावरण की रक्षा के लिए वनों के प्रबंधन पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान दिया जाने लगा है। यही कारण है कि वन प्रबंधन करियर के विकल्प के तौर पर सामने आ रहा है

पर्यावरण को बचाने की होड़, कॉरपोरेट क्षेत्र में पर्यावरण के प्रति बढ़ता रुझान और फॉरेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए फॉरेस्ट मैनेजमेंट कोर्स मददगार साबित हो सकता है। वनों की देखभाल के साथ-साथ उनका प्रबंधन काफी मायने भी रखता है। फॉरेस्ट मैनेजमेंट के लिए भोपाल स्थित देश का एकमात्र भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) बेहतर विकल्प हो सकता है। चूंकि आज के दौर में सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर वन प्रबंधन की ओर काफी ध्यान दिया जाने लगा है , इस कारण वर्तमान में यहां के छात्रों की मांग देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों, बैंक, क्लाइमेट चेंज के लिए काम करने वाले संस्थान और एनजीओ हैं। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में तीन कोर्स संचालित किये जाते हैं- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फॉरेस्ट्री मैनेजमेंट (पीजीडीएफएम), फेलो प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (एफपीएम) और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में एमफिल। वर्तमान समय में पीजीडीएफएम में नामांकन के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इस कोर्स में कुल 93 सीटें हैं।

योग्यता
पीजीडीएफएम पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स है। इसके लिए कम से कम स्नातक या मान्यता प्राप्त संस्थानों से इसके समकक्ष पाठ्यक्रम में उत्तीर्ण होना जरूरी है, वह भी 50 फीसद अंक के साथ। स्नातक के अंतिम वर्ष के छात्र भी इस पाठय़क्रम के लिए आवेदन कर सकते हैं लेकिन उन्हें 30 जून 2013 से पहले स्नातक उत्तीर्ण होने का प्रमाणपत्र आईआईएफएम के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

शर्त
इस संस्थान में एडमिशन भारतीय प्रबंधन संस्थानों द्वारा आयोजित कॉमन एप्टीटय़ूट टेस्ट (कैट) में प्राप्त अंकों के आधार पर होगा। इसलिए छात्रों को आवेदन करते समय सीएटी के स्कोर को बताना होगा।

प्लेसमेंट
यहां के विद्यार्थियों के लिए कैम्पस प्लेसमेंट की व्यवस्था है। छात्रों के प्लेसमेंट की प्रतिशतता सौ फीसद है। बीते वर्ष में इस संस्थान के छात्रों को औसतन सात लाख रुपए सालाना का पैकेज मिला है। यहां कंपनियां, पेपर इंडस्ट्री, बैंक में माइक्रो फाइनेंस के लिए, क्लाइमेट चेंज और ग्रास रूट लेवल काम करने वाले एनजीओ आदि कैंपस के लिए आते हैं।

चयन
नामांकन की पूरी प्रक्रिया दो चरणों में है। पहला चरण आवेदन की प्रक्रिया है जबकि दूसरा चरण ग्रुप डिस्कशन या साक्षात्कार है। पहले चरण में भारतीय प्रबंधन सं स्थानों (आई आईएम) द्वारा आयोजित कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) की परीक्षा में प्राप्त स्कोर के आधार पर आईआईएफएम शॉर्टिलस्टिंग की जाती है, हालांकि आईआईएफएम के नामांकन प्रक्रिया या पाठय़क्रम के दौरान आई आई एम की कोई भूमिका नहीं है। पीजीडीएफएम करने के इच्छुक उम्मीदवार को आवेदन फार्म के साथ सीएटी का रजिस्ट्रेशन नंबर और स्कोर बताना होता है। इसके लिए सीएटी के वाउचर रसीद की फोटो कॉफी आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाती है। दूसरे चरण में प्राप्त आवेदनों में सीएटी के स्कोर के आधार पर उम्मीदवारों की शॉर्टिलस्टिंग की जाती है। इसके आधार पर उम्मीदवार को ग्रुप डिस्कशन या साक्षात्कार के लिए फरवरी या मार्च 2013 में भोपाल बुलाया जाएगा। अधिक जानकारी आईआईएफएम की वेवबाइट पर जाकर ली जा सकती है या फिर पर संपर्क कर सकते हैं।

Sunday, October 28

साइबर एर्क्‍सपट्स की बढ़ती मांग

अगर विज्ञान वरदान है तो अभिशाप भी है। एक ओर इंटरनेट ने घर बैठे पूरे विश्व को कम्प्यू टर स्क्रीन पर ला दिया है तो वहीं इंटरनेट से पनपे साइबर क्राइम के विभिन्न रूपों से हमें सामना भी करना पड़ रहा है। आजकल अकसर हमें वेबसाइट हैकिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, साइबर बुलिंग, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, पोर्नोग्राफी जैसी समस्याओं से ही नहीं, साइबर आतंकवाद से भी जूझना पड़ रहा है। ऐसे में, साइबर सिक्योरिटी से जुड़े प्रोफेशनल्स की जरूरत काफी बढ़ गई है
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2011 में जहां साइबर हमलों की संख्या 13,500 के करीब थी, वहीं इस साल सितम्बर तक यह संख्या 20,000 है। माना जा रहा है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए देश को पांच लाख पेशेवर चाहिए। यही कारण है कि साइबर अपराध के प्रति बढ़ती जागरूकता व सजगता के कारण साइबर सिक्योरिटी बेहतर करियर के साथ-साथ देश और समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी देता है। कार्य कंप्यूटर यूजर्स के लिए हैकिंग सबसे बड़ी परेशानी है। इसके जरिए अपराधी गोपनीय सूचनाओं को हैक कर सकता है, जैसे पार्सवड, क्रेडिट कार्ड नंबर और पिन कोड, इंटरनेट बैंकिंग पार्सवड आदि। हैकिंग से संबंधित समस्याओं को सुलझाने के लिए एथिकल हैकिंग प्रोग्राम की मदद ली जाती है। किसी साइबर क्राइम के बाद यह पता लगाना कि उससे संबंधित ई-मेल कहां से भेजा गया, किस आईपी एड्रेस का उपयोग किया गया आदि कार्य साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के ही जिम्मे होता है। इंटरनेट से संबंधित विभिन्न अपराधों को हेंडल करने के लिए साइबर लॉ का भी इस्तेमाल किया जाता है।

Thursday, October 18

अपार अवसर देता रेलवे


 भारत में सबसे अधिक नौकरियां रेलवे में हैं क्योंकि आवागमन से लेकर माल ढुलाई तक में इसकी उपयोगिता है। रेलवे परिचालन से ले कर खान-पान तक की सेवा मुहैया कराता है और यात्रियों की हर सेवा के लिए दिन-रात काम करता है। यही कारण है कि यहां छोटे लेवल से लेकर बड़े लेवल तक काफी संख्या में भर्तियां होती हैं

आवेदन की अंतिम तिथि : 31 अक्टूबर 2012
 
रेलवे में करियर की संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। यहां हमेशा कोई न कोई रिक्तियां निकलती रहती हैं। वै से भी, इस समय रेलवे में ढाई लाख पद रिक्त हैं और तकरीबन हर साल पचास हजार कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में, रेलवे में भविष्य नौकरी के लिहाज से बहुत उत्साहवर्धक है। माना जा रहा है कि केवल इसी वित्त वर्ष में रेलवे डेढ़ लाख कर्मचारियों की बहाली करेगा। अगर आप दुनिया के दूसरे सबसे बड़े रेल तंत्र का हिस्सा बनना चाहते हैं तो अपनी तैयारी को पुख्ता कर लीजिए। इसी क्रम में रेलवे भर्ती सेल, दक्षिण-पूर्वी रेलवे, कोलकाता ने ग्रुप-डी के तहत हेल्पर, ट्रैक मैन, प्वाइंट मैन व चपरासी के करीब ढाई हजार पदों के लिए आवेदन मांगे हैं।

चयन प्रक्रिया
 चयन प्रक्रिया दो चरणों में बंटी हुई है। पहले चरण में लिखित परीक्षा होगी। इस परीक्षा में दसवीं या इससे नीचे की कक्षाओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। दो सौ अंकों के प्रश्नपत्र में सभी प्रश्न बहुवैकल्पिक होंगे। इसमें गणित, हिन्दी और अंग्रेजी व्याकरण, सामान्य ज्ञान, सामान्य विज्ञान तथा समसामयिक प्रश्नों के अलावा तर्कशक्ति के परीक्षण के लिए रीजनिंग से संबंधी प्रश्न पूछे जाएंगे। लिखित परीक्षा में न्यूनतम अर्हता प्राप्त करने वाले परीक्षार्थियों को दूसरे चरण में शारीरिक दक्षता जांच (फिजिकल इफिशिएंसी टेस्ट यानी पीईटी) के लिए बुलाया जाएगा। लिखित परीक्षा में न्यूनतम अर्हता का निर्धारण रेलवे भर्ती सेल रिक्त पदों और आवेदकों की संख्या के मुताबिक तय करता है। पीईटी में पुरुष उम्मीदवार को छह मिनट में 1500 मीटर की दूरी तय करनी है जबकि महिला उम्मीदवार को 400 मीटर की रेस तीन मिनट में तय करनी है। रेस के लिए अभ्यर्थी को मात्र एक चांस मिलेगा। इसी में अपनी काबिलियत दिखानी है। पीईटी के समय ही परीक्षार्थियों के मूल प्रमाणपत्र की जांच की जाएगी। पीईटी की परीक्षा पास करने के बाद सफल उम्मीदवारों को मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा। उसके बाद नौकरी के लिए सफल उम्मीदवार की घोषणा समाचारपत्रों और रेलवे की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी। सफल उम्मीदवारों को पत्र के माध्यम से व्यक्तिगत सूचना भी भेजी जाएगी।

तैयारी 
लिखित परीक्षा के सभी प्रश्नों के चार उत्तर दिये जाएंगे। उन्हीं चारों में से एक उत्तर सही होगा। सही उत्तर के सामने गोले को काले या नीले पेन से कलर करना है। ऐसे में उत्तर काफी सोच-समझ कर देना है, क्योंकि एक तो यहां उत्तर बदलने का मौका नहीं मिलेगा। दूसरा, प्रत्येक गलत उत्तर पर प्राप्तांक में से 1/3 अंक काट लिया जाएगा। चूंकि परीक्षा का स्तर दसवीं या दसवीं से नीचे की कक्षाओं का होगा, ऐसे में छठी से दसवीं कक्षा तक के सभी विषयों की किताबों को एक बार फिर से दोहराना चाहिए। इससे स्कूली कक्षा में किए गए अध्ययन को दोबारा पढ़ने का मौका मिलेगा। समसामयिक की तैयारी के लिए नियमित रूप से कम से कम एक राष्ट्रीय समाचारपत्र पढ़ना चाहिए। बाजार में कई तरह के प्रतियोगिता की तैयारी संबंधी पत्रिकाएं उपलब्ध है। कन्साइज रूप में समसामयिक की तैयारी के लिए नियमित पत्रिकाओं को भी पढ़ना चाहिए। निर्धारित समय पर परीक्षा के सारे प्रश्नों को हल करना होता है। ऐसे में पढ़ाई के दौरान खुद से भी परीक्षा हॉल जैसा माहौल क्रिएट करें और तय समय पर 200 प्रश्नों को सही-सही हल करने की कोशिश करें। एक दिन में समय का पाबंद नहीं बना जा सकता। इसके लिए निरंतर कोशिश करते रहें। शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए यह बहुत जरूरी है। लिखित परीक्षा के साथ-साथ पीईटी में भी उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। ऐसे में, अपनी दिनर्चया सिस्टमेटिक रखनी होगी। पीईटी के दौरान रेस के लिए केवल और केवल एक मौका मिलेगा, इसलिए रोजाना दौड़ने का अभ्यास ऐसे करना चाहिये जैसे कि पीईटी की परीक्षा दे रहे हों। बाजार में रेलवे भर्ती प्रतियोगिता को लेकर पूर्व में आयोजित परीक्षा का प्रश्नपत्र क्वेश्चन बैंक के रूप में उपलब्ध है। उन सेटों को हल करना चाहिए। इससे न केवल आप अपनी तैयारी का मूल्यांकन कर पाएंगे बल्कि निर्धारित समय पर सारे प्रश्नों को हल कर पाने में सक्षम भी हो सकेंगे।

Tuesday, October 9

क्रिएटिव हैं तो आजमाएं फैशन डिजाइनिंग

design फैशन डिजाइनरों की मांग आज सिर्फ पेरिस और लंदन में ही नहीं है बल्कि अब तो इसके एक्सपर्ट छोटे शहरों में भी छाये हुए हैं। इससे संबंधित कोर्स करने के बाद इसकी व्यापकता का पता चलता है और फिर आप जान पाते हैं कि वर्तमान में किस तरह के फैशन का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है


आये दिन बाजार में फैशन के नये डिजाइन, नए तरीके का कलर कंबिनेशन देखने को मिलता है। इस कारण फैशन डिजाइन का क्रेज दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। हमेशा कुछ न कुछ नया करने की ख्वाहिश रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह करियर का बेहतर आप्शन है। यहां हमेशा नया करने का मौका भी है और इसके माध्यम से खुद को स्थापित करने का अवसर भी। फैशन डिजाइनिंग में रुचि रखने वालों को राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) के कोर्स नई राह दिखाते हैं।

राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) डिजाइन शिक्षा, व्यावहारिक शोध, प्रशिक्षण, डिजाइन परामर्शी सेवाएं के अलावा कई क्षेत्रों में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। वर्ष 1961 में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन इस स्वायत्त संस्थान की स्थापना की गई। एनआईडी में ग्रेजुएशन डिप्लोमा प्रोग्राम इन डिजाइन (जीडीपीडी) और पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा प्रोग्राम इन डिजाइन (पीजीडीपीडी) पाठय़क्रमों के लिए वर्ष 2013-14 के लिए आवेदन मांगे हैं। ग्रेजुएट कोर्स के लिए बारहवीं पास और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए बैचलर की डिग्री जरूरी है। अनुभवी अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाती है। अभ्यर्थी के पास विजुअल परसेप्शन एबिलिटी, ड्राइंग स्किल, लॉजिकल रीजनिंग, क्रिएटीविटी और कम्युनिकेशन स्किल्स का होना जरूरी है।

चयन 
एनआईडी द्वारा संचालित पाठय़क्रमों में दाखिला लेने के लिए इच्छुक छात्रों को संस्थान द्वारा आयो जित डिजाइन एप्टीटय़ूड टेस्ट (डीएटी) की परीक्षा पास करनी होगी। यह परीक्षा दो चरणों में होगी। पहले चरण में लिखित परीक्षा है। इसमें 100 अंक के प्रश्न पत्र होंगे। लिखित परीक्षा में एनिमेशन, एबस्ट्रैक्ट सिम्बोलिज्म, कम्पोजिशन, मेमोरी ड्रॉइंग, थीमेटिक कलर अरेंजमेंट, विजुअल डिजाइन के अलावा विजुअल परसेप्शन एबिलिटी, ड्राइंग स्किल, लॉजिकल रीजनिंग, क्रिएटिव एंड कम्युनिकेशन स्किल, फंडामेंटल डिजाइन के अलावा डिजाइन से संबंधित प्रॉब्लम सॉ ल्विंग कैपेसिटी आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य उम्मीदवारों की योग्यता, नवीनता और धारणाओं का मूल्यांकन करना है। लिखित परीक्षा के आधार पर परीक्षार्थियों को शॉर्ट लिस्टेड किया जाएगा। इसके आधार पर योग्य अभ्यर्थी को स्टूडियो टेस्ट और साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। स्टूडियो टेस्ट के माध्यम से अभ्यर्थी की क्रिएटिविटी और फैशन के प्रति लगाव, डिजाइनिंग के प्रति सोच, नए आइडिया, कल्पनाशक्ति और कुछ अलग हटकर सोचने की क्षमता को परखा जाता है। परीक्षा से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए एनआईडी कैम्पस से संपर्क कर सकते हैं या फिर वेबसाइट पर लॉग ऑन कर सकते हैं।

तैयारी 
इसकी तैयारी अन्य परीक्षाओं से काफी अलग है। इसमें विद्यार्थियों को रट्टा लगाने से सफलता नहीं मिल सकती है। इसमें कामयाब होने के लिए मौलिकता की सख्त दरकार होती है। अभ्यर्थियों का डिजाइनिंग के प्रति रुझान, उसके प्रति उनकी समझ, विचारों व समस्या को सुलझाने की क्षमता को परखी जाती है। ऐसे में बेहतर करने के लिए जरूरी है कि आप जो भी बनाएं, उसे इलेस्ट्रेशन एवं शब्दों के माध्यम से समझाने की भी क्षमता रखें। डीएटी और स्टूडियो टेस्ट के जरिये अभ्यर्थी की ऑब्जर्वेशन पावर, डिजाइन करने की काबिलियत और कुछ नया तैयार करने की क्षमताओं को परखा जाता है। ऐसे में आप जो भी डिजाइन और चित्र बनाएं, उसके रंगों के कंबिनेशन पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। स्टूडियो टेस्ट में अभ्यर्थी को एक सवाल और उससे संबंधित कुछ सामान उपलब्ध कराया जाता है, जिसके जरिये अभ्यर्थी को उस सवाल के आधार पर सामान तैयार करना होता है। टेस्ट के तुरंत बाद एक्सपर्ट पैनल उसे देखता है और मार्किंग करता है। स्टूडियो टेस्ट देते समय घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि दाखिले के लिए जो एबिलिटी चाहिए, वह काफी हद तक लिखित परीक्षा में ही परख कर ली जाती है। कम्युनिकेशन और विजुअलाइजे शन एक-दूसरे के पूरक हैं। कम्युनिकेशन ऐसा होना चाहिए कि जैसे शब्द दृश्य का कार्य करें और दृश्य शब्दों के पूरक हों। इसमें संवाद, स्लोगन और कॉपी राइटिंग महत्वपूर्ण है। आपमें सृजनात्मक सोच, कुछ नया करने का हुनर, ताजातरीन घटनाओं की जानकारी, बेहतर प्लानिंग और लीक से हटकर काम करने का जुनून हो। इस तरह के गुण इसलिए जरूरी हैं क्योंकि ये लोग वस्तुओं व उत्पादों की डिजाइन तय करते हैं। अगर आपके पास मौलिक सोच है और अपनी सोच को डिजाइन के माध्यम से कहने में सफल होते हैं, तो सफलता के चांस बढ़ते हैं। डिजाइन के क्षेत्र में यदि देश-विदेश में कुछ नया हो रहा है, तो आपको इस तरह की खबर पर पैनी निगाह रखनी चाहिए। यह न केवल परीक्षा के लिहाज से जरूरी है बल्कि एक डिजाइनर की हैसियत से भी जरूरी है।

Tuesday, October 2

इंजीनियरिंग का प्रवेश द्वार जेईई

आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एनआईटी में दाखिला 2013 से नये प्रारूप में होगा। नये प्रारूप में सीबीएसई ने अखिल भारतीय स्तर पर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन के लिए ज्वाइंट इंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) आयोजित कर रही है। जेईई दो भागों में बंटा है - जेईई मेन और जेईई एडवांस। जेईई मेन में सफल अभ्यर्थी ही जेईई एडवांस परीक्षा में बैठ सकेंगे और फिर इस परीक्षा में सफल अभ्यर्थी का देश के विभिन्न आईआईटी में एडमिशन होगा


परीक्षा प्रारूप
जेईई मेन में तीन घंटे का एक ऑब्जेक्टिव पेपर होगा। बीई, बीटेक में एडमिशन लेने वालों को फिजिक्स, कैमेस्ट्री और मैथमेटिक्स से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे जबकि बीआर्क और बी प्लानिंग में एडमिशन लेने वालों को मैथ्स, एप्टीट्यूड टेस्ट और ड्राइंग टेस्ट देना होगा। जेईई मेन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से होगी। जेईई मेन की ऑफलाइन परीक्षा 7 अप्रैल 2013 को होगी। जेईई मेन देने वाले विद्यार्थियों में से डेढ़ लाख छात्रों का रिजल्ट मई के पहले सप्ताह में घोषित किया जाएगा। सफल विद्यार्थी जेईई एडवांस की परीक्षा के लिए क्वालिफाई होंगे। जेईई एडवांस की परीक्षा देने के लिए फिर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जेईई एडवांस का आयोजन 2 जून 2013 को होना है। इसमें सफल होने वाले विद्यार्थियों की ऑल इंडिया रैंक (एआईआर) की सूची बनाई जाएगी। एडवांस के सफल विद्यार्थियों की काउंसलिंग आईआईटी, दिल्ली की देखरेख होगी जबकि जेईई मेन की काउंसलिंग सीबीएसई कराएगा। जेईई एपेक्स बोर्ड के अनुसार, एनआईटी, आईआईआईटी, डीटीयू औ र अन्य इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए मेरिट लिस्ट में 12वीं के 40 फीसदी अंकों को वेटेज दिया जाएगा। 60 प्रतिशत जेईई मेन के परफॉर्मेंस पर रहेंगे।

तैयारी के टिप्स
पेपर वन में फिजिक्स, कैमेस्ट्री, मैथ्स को बराबर वेटेज मिलता है, लेकिन मैथ्स में अच्छा प्रदर्शन रैंक को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। डिफ्रेंशियल कैलकुलस, ट्रिग्नोमेट्री, प्रोबेबिलिटी, परम्यूटेशन-कॉम्बिनेशन, कोऑर्डिनेट ज्योमेट्री स्कोरिंग माना जाता है। फिजिक्स के प्रश्नों का बड़ा हिस्सा डायमेंशन, इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म, इलेक्ट्रॉनिक्स, कैलकुलस पर आधारित होता है। प्रश्नों में आने वाले घुमावों के मद्देनजर बेसिक क्लियर होना जरूरी है। इसके प्रश्न सीबीएसई एग्जाम पैटर्न पर आधारित होते हैं। ऐसे में बारहवीं या इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान जो छात्र सिलेबस पर पकड़ बना लेते हैं, उन्हें जेईई की चुनौती आसान हो जाती है। इंजीनियरिंग परीक्षाओं में छात्र मैथ्स, फिजिक्स पर ज्यादा फोकस करते हैं, नतीजतन उनकी कैमेस्ट्री की सही तैयारी नहीं हो पाती। कैमेस्ट्री को इग्नोर करने का परिणाम खराब रैंक के तौर पर मिलता है। अच्छे रैंक के लिए कैमेस्ट्री की तैयारी भी जरूरी है। इसमें ऑर्गेनिक रिएक्शन, इलेक्ट्रो रिएक्शन, केमिकल बॉन्डिंग, आइसोमेरिज्म, मोल कॉन्सेप्ट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। एक सफल इंजीनियर को अपने आपको इस स्तर तक मांझना होता है कि वह स्वतंत्र रूप से कोई भी प्रोजेक्ट या प्लानिंग कर सके। ऐसे हर व्यक्ति को अपना स्टाइल बनाना जरूरी हो श्ा ै िक्ष क योग्यता जेईई मेन के लिए विद्यार्थी को
जाता है। फैसला अपने स्टाइल में लेना होता है। घबराहट और एग्जाम के प्रेशर में निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित होती है। जाहिर है कि इससे गलतियां भी होती है। ऐसे में अपनी मानसिक शक्ति को बनाए रखने की खासी जरूरत है। स्टडीज में निरंतरता बनाए रखने में ही यहां सफलता मिलती है। कोई भी टॉपिक यूजलेस है, ऐसा पूर्वाग्रह नुकसानदेह होता है। ज्यादा लिमिटेशन और ज्यादा एक्सपोजर दोनों ही सिचुएशन खतरनाक हैं। यहां बैलेंस बनाकर चलना जरूरी है। खुले दिल से पढ़ने की जरूरत है। हमेशा रियलिस्टिक लक्ष्य निर्धारित करें और उस पर खरा उतरने की कोशिश करें। विषय संबंधी कॉन्सेप्ट क्लीयर रखें। बेसिक नॉलेज को पुख्ता करें और उन्हें रिवाइज करें। इसके लिए ब्रॉड लेवल पर डीप और फोकस्ड स्टडी जरूरी है। ऐसे में, सिर्फ कोचिंग के नोट्स पर डिपेंड रहना खतरनाक है। फिजिक्स, मैथ्स, कैमेस्ट्री के फार्मूले बनाकर उन्हें अपने कमरे की दीवार पर लगाएं ताकि चलते-फिरते उस पर नजर पड़े और आप उसे दोहरा सकें। अकसर परीक्षा के पास आते-आते घबराहट में कम छात्र सोते हैं और सही तरीके से पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पाते हैं। इस लेबल पर ज्यादा फिनिशिंग की जरूरत होती है। हर हाल में डर और घबराहट पर कंट्रोल करना चाहिए। पेशंस और साउंड स्लीप पर फोकस करें। सभी प्रश्न बहुवैकल्पिक है और परीक्षा में नकारात्मक अंक भी है। प्रत्येक एक गलत उत्तर पर एक-चौथाई अंक प्राप्तांक में से काट लिया जाएगा। ऐसे में प्रश्नों को हल करते समय एहतियात बरतने की जरूरत है।

Friday, September 28

भू-विज्ञान में रोजगार

वर्तमान समय में भूवैज्ञानिकों की काफी मांग है। पृथ्वी के भीतर की संरचनाओं में उथल-पुथल, इसकी जलवायु में हो रहे परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिग के साथ पिघल रहे ग्लेशियर और समुद्र के जीवन की बेहतर समझ वाले लोग महत्वपूर्ण हो गए हैं क्योंकि उनके अनुमान और रिजल्ट के आधार पर ही आगे की प्लानिंग की जाती है। अब तो उनकी भूमिका सौरमंडल के अन्य ग्रहों पर भी दिखने लगी है। यही कारण है कि इस फील्ड में करियर की असीम संभावनाएं सामने आ रही हैं


खनिज बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन हैं। भारतीय भूिवज्ञान सव्रेक्षण विभाग का काम है राष्ट्र के हित में खनिजों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना। राष्ट्रहित को सवरेपरि रखते हुए खनिज अनुसंधान, राष्ट्रीय आपदा अनुमान, अंतरराष्ट्रीय आपदा अनुमान, क्षमता और विकास आदि के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग करना इसका काम है। भूवैज्ञानिक पृथ्वी की जलवायु में हो रहे परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिग के कारण पिघल रहे ग्लेशियर से लेकर समुद्री जीवन की समझ रखते हैं। केंद्रीय खनन मंत्रालय के अधीनस्थ भारतीय भू-विज्ञान सव्रेक्षण विभाग दुनिया के सबसे पुराने संगठनों में से एक है। इस विभाग में भू-विज्ञानी के ग्रुप ‘ए‘ और ग्रुप ‘बी’ के पदों की भर्ती की जा रही है। यो ग्यता जो भी अभ्यर्थी इस फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं, उनके पास भू-वैज्ञानिक विज्ञान, भू-विज्ञान, भू अन्वेषण, इंजीनियरी भू-विज्ञान, समुद्री भू-विज्ञान, पेट्रोलियम भू-विज्ञान, भू-रसायन, पृथ्वी विज्ञान और संसाधन प्रबंधन या सागर विज्ञान और तटीय क्षेत्र अध्ययन विषयों में से किसी एक विषय में मास्टर डिग्री होनी चाहिए। मास्टर डिग्री का तात्पर्य, तीन वर्षीय स्नातक के बाद स्नातकोत्तर डिग्री या डिप्लोमा से है, जो दो वर्षो की अवधि का हो।

चयन 
चयन प्रक्रिया दो चरणों में होगी, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार। लिखित परीक्षा के तहत चार प्रश्न पत्र होंगे। सभी प्रश्न पत्रों को हल करने के लिए तीन-तीने घं टे निर्धारित किये गए हैं। पहला प्रश्न पत्र सामान्य अंग्रेजी का है जो सौ अंकों का रहेगा। अन्य तीनों प्रश्न पत्र भू-विज्ञान से होंगे और तीनों प्रश्न पत्रों के अंक दो-दो सौ होंगे। पहले प्रश्न पत्र में अंग्रेजी में एक लघु निबंध लिखना होगा। इसमें पूछे गए अन्य प्रश्नों का उद्देश्य उम्मीदवार के अंग्रेजी समझने की क्षमता तथा सटीक शब्दों के इस्तेमाल का आकलन करना है। दूसरे प्रश्नपत्र में भू आकृति विज्ञान,
सुदूर संवेदन, संरचना, स्ट्रेटोग्राफी, जीवाश्म विज्ञान से संबंधित, तीसरे प्रश्नपत्र में इंडियन मिनरल डिपॉजिट और मिनरल इकोनॉमी, अयस्क मिनरल, एक्सप्लोरेशन जिओलॉजी ऑफ फ्यूल, इंजीनियरी भू-विज्ञान आदि पाठों से
संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। सभी विषयों की परीक्षा पूर्णत: निबंधात्मक होगी। सभी प्रश्नपत्र अंग्रेजी में होंगे। व्यक्तित्व परीक्षण के लिए दो सौ अंकों का साक्षात्कार है जो सक्षम और निष्पक्ष प्रेक्षकों के बोर्ड द्वारा लिया जाएगा। साक्षात्कार बोर्ड के पास पहले से ही उम्मीदवार का पूरा डाटा होगा। साक्षात्कार के दौरान नेतृत्व, बौद्धिक जिज्ञासा, मानसिक और शारीरिक शक्ति, अन्य सामाजिक गुण, व्यावहारिक क्षमताओं का आकलन किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें : www.upsconline.nic.in

आवेदन इस विभाग में भू-विज्ञानी ग्रुप-क के 300 पद और सहायक भूिवज्ञानी ग्रुप-ख के 67 पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसके लिए इच्छुक आवेदक संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन मोड से आवेदन कर सकते हैं।

Tuesday, September 18

अहम है अनुवादक




आवेदन की अंतिम तिथि : 5 अक्टूबर 2012


अगर आपकी हिन्दी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ है और अनुवाद में करियर बनाना चाहते हैं तो कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) आपकी इच्छा को पूरी कर सकता है। केंद्र सरकार के अधीनस्थ कार्यालयों में कनिष्ठ अनुवादक के पद के लिए एसएससी ने आवेदन मांगे हैं। इच्छुक आवेदकों को अपने पसंदीदा परीक्षा केंद्र के मुताबिक आयोग के क्षेत्रीय कार्या लय के पते पर आवेदन भेजना अनिवार्य है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा नहीं है।

शैक्षिक योग्यता
आवेदक के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय अथवा संस्थान से हिन्दी या अंग्रेजी में मास्टर डिग्री या समतुल्य डिग्री होनी चाहिए। इसके साथ स्नातक में अनिवार्य या वैकल्पिक विषय के रूप में हिन्दी या अंग्रेजी रही हो। इसके अलावा, मान्यता प्राप्त संस्थानों से अनुवाद में डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स या सरकार के अधीनस्थ कार्यालयों में दो साल का अनुवाद का काम करने का अनुभव होना चाहिए।

उम्र 
अभ्यर्थी का जन्म दो अगस्त 1982 या उसके बाद हुआ हो यानी एक अगस्त 2012 की तारीख तक उसकी उम्र तीस वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उम्र सीमा में केंद्र सरकार के नियमानुसार छूट का प्रावधान है।

चयन प्रक्रिया 
चयन प्रक्रिया दो चरणों में है- लिखित परीक्षा और साक्षात्कार।
लिखित परीक्षा के तहत दो प्रश्नपत्र होंगे। दोनों को हल करने के लिए दो-दो घंटे निर्धारित किये गए हैं। प्रश्नपत्रों का स्तर स्नातक है।
पहले प्रश्नपत्र में सौ अंकों के सौ प्रश्न सामान्य हिन्दी के और सौ अंकों के इतने ही प्रश्न सामान्य अंग्रेजी के होंगे। इन प्रश्नों के माध्यम से भाषा, साहित्य, सही शब्द, मुहावरे और लोकोक्तियों पर अभ्यर्थी की जबरदस्त पकड़ का आकलन किया जाता है।
दूसरा प्रश्नपत्र भी दो सौ अंकों का है। इसमें हिन्दी से अंग्रेजी में एक और अंग्रेजी से हिन्दी में एक अनुवाद करना है। इसके अलावा, एक निबंध अंग्रेजी में और एक हिन्दी में लिखने के लिए कुछ टॉपिक दिये जाएंगे। इस प्रश्नपत्र के माध्यम से दोनों भाषाओं पर पकड़, अनुवाद करने की कुशलता और कौशल क्षमता को परखा जाएगा।

साक्षात्कार
लिखित परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर साक्षात्कार के लिए शॉर्ट लिस्टेड किया जाएगा। साक्षात्कार सौ अंकों का है। इसमें आवेदक के व्यक्तित्व और उसके निजी प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। केवल एससी/एसटी के छात्रों को साक्षात्कार में आने-जाने के लिए यात्रा भत्ता दिया जाएगा। अभ्यर्थियों द्वारा लिखित और साक्षात्कार में प्राप्त कुल अंकों के आधार पर नियुक्ति की संस्तुति की जाएगी।

महत्वपूर्ण
महज डिग्री या डिप्लोमा से ही अनुवाद के स्किल्स प्राप्त नहीं किये जा सकते। भाषा और साहित्य का अध्ययन पठन- पाठन की प्रक्रिया है। पढ़ने-लिखने, विचार करने और किसी भी सिद्धांत और उसके व्यावहारिक पक्ष को समझने का भरपूर मौका मिलता है। अनुवाद दो भाषाओं के बीच पुल का काम करता है। एक अनुवादक को इस कड़ी में स्रेत भाषा से लक्ष्य भाषा में जाने के लिए दूसरे के इतिहास और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का भी ज्ञान हासिल करना होता है। ऐसे में अनुवाद के लिए निरंतर अभ्यास और व्यापक ज्ञान की जरूरत होती है। अनुवाद साधना की तरह है। लेखक की अपनी शैली होती है। अनुवादक का कर्तव्य है कि वह अनुवाद में लेखक की शैली बरकरार रखे। अनुवाद लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। मसलन शब्दकोश, संदर्भ ग्रंथ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की मदद से अनुवाद कार्य पूरा किया जाता है। अनुवाद में शब्दद र-शब्द, शाब्दिक अनुवाद, भावानु वाद, विस्तारानुवाद और सारानुवाद जैसी कई चीजें प्रचलित हैं। यह क्षेत्र के हिसाब से तय होता है कि किसको-क्या चाहिए।

सरकारी दफ्तरों में आमतौर पर शब्द-दर-शब्द अनुवाद करने की ही परंपरा है। अध्ययन सामग्री तैयार करने में विस्तार से अनुवाद करने की जरूरत पड़ती है। एक प्रोफेशनल अनुवादक बनने के लिए विश्वविद्यालयों में डिप्लोमा और डिग्री के कई कोर्सेज हैं। डिप्लोमा एक साल का होता है। इसमें दाखिला लेने के लिए किसी भाषा में स्नातक होना जरूरी है। साथ ही, दूसरी भाषा के ज्ञान और पढ़ाई की भी मांग की जाती है। मसलन, हिंदी-अंग्रेजी अनुवाद के डिप्लोमा कोर्स के लिए दोनों भाषाओं का ज्ञान जरूरी है। इनमें से छात्र ने किसी एक में स्नातक किया हो। साथ ही, दूसरी भाषा भी पढ़ी हो।

ऐसे करें पीओ की तैयारी


निजी बैंकों के आने और राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं की जबरदस्त बढ़ोत्तरी के कारण बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफीसर (पीओ) पद की मांग में इजाफा हुआ है.

बैंकिंग सेक्टर शुरू से ही युवाओं को लुभाता रहा है। बेहतर सैलरी, अच्छा इनवायरमेंट, साथ ही लोगों से हर दिन रू-ब-रू होने का मौका काफी कम नौ करियों में मिलता है। बैंकों में भी नौकरी के अलग-अलग स्टेज हैं लेकिन प्रोबेशनरी ऑफीसर की नौकरी का अलग ही क्रेज है। कभी वह भी दौर था जब लोगों का चयन सिविल सेवा में न हो पाने पर वे बैंकों में पीओ बनने को तवज्जो देते थे क्योंकि बैंक में अधिकारी बनने की प्रक्रिया पीओ से ही शुरू होती है। किसी भी बैंक के संचालन से लेकर मैनेजमेंट को-ऑर्डिनेशन का पूरा काम पीओ ही देखते हैं। यहां तक कि बैंक को किस प्रोजेक्ट या प्रोफाइल पर काम करना है, यह तय करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर ही रहती है।

पिछले कुछ दशकों से भारत में निजी बैंकों के आने और राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं की जबरदस्त बढ़ोतरी के कारण बैंक पीओ की मांग में इजाफा हुआ है। साथ ही, आने वाले समय में इन बैंकों का और भी विस्तार होना है। इसके अलावा, अनुमान है कि वर्ष 2013 में डेढ़ लाख से भी ज्यादा बैंक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में, इन दिनों बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की बहार आई हुई है।

परीक्षा एवं चयन प्रक्रिया बैंक प्रोबेशनरी ऑफीसर परीक्षा एवं चयन प्रक्रिया दो चरणों में लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और ग्रुप डिस्कशन के जरिए होती है। लिखित परीक्षा के तहत पहले चरण में ऑब्जेक्टिव टाइप के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें रीजनिंग, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, जनरल अवेयरनेस और इंग्लिश से संबंधित प्रश्न होते हैं। उसके बाद डिस्क्रिप्टिव परीक्षा होती है। सामान्यत: यह परीक्षा इंस्टीटय़ूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन (आईबीपीएस) लेती है। इसमें उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को एक स्कोर दिया जाता है। विभिन्न बैंकों में स्कोर के मुताबिक इंटरव्यू या ग्रुप डिस्कशन के लिए बुलाया जाता है। इसमें सफल होने के बाद अभ्यर्थी का चयन पीओ पद के लिए किया जाता है।

पीओ के लिए तैयारी
  • किसी भी परीक्षा की तैयारी के लिए सिलेबस के साथ मार्गदर्शन की भी जरूरत होती है। मुकम्मल तैयारी के लिए पूरे सिलेबस पर एक नजर दौड़ानी चाहिए। 
  • मार्गदशर्न के लिए किसी अच्छी कोचिंग की सहायता ली जा सकती है। चाहें तो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे सीनियर्स से भी मदद ले सकते हैं। 
  • डाटा एनालिसिस एंड इंटरप्रिटेशन, रीजनिंग, जनरल अवेयरनेस और इंग्लिश लैंग्वेज- सभी विषयों की तैयारी के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है। इसके लिए सभी विषयों के लिए एक नियत समय निर्धारित करना होगा। उसके अनुरूप तैयारी करनी होगी। 
  • गणित की तैयारी के लिए कुछ बढ़िया पुस्तकें मिलती हैं। उनका गहन अध्ययन कर सकते हैं। मैथ्स के सवाल हल करते समय इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि कम से कम समय में कैसे अधिक से अधिक प्रश्नों को हल निकाला जा सकता है। यह तभी संभव है जब मैथ्स के महत्वपूर्ण सूत्रों को याद रखेंगे। गणित के सवाल हल करते समय इस बात का ध्यान रखें कि यदि आपने सही कर लिया तो पूरे के पूरे अंक मिलेंगे। 
  • रीजनिंग और न्यूमेरिकल के लिए बाजार में कई किताबें उपलब्ध है। प्रतियोगी पत्रिकाओं में भी प्रैक्टिस सेट होते हैं। उसे निर्धारित समय में हल करने की कोशिश करते रहिये। 
  • इंग्लिश ग्रामर के लिए रेन एंड मार्टिन जैसी पुस्तकों का सहारा लिया जा सकता है। इसके साथ ही कोई राष्ट्रीय अंग्रेजी समाचारपत्र नियमित पढ़ने से शब्द-भंडार को बढ़ाया जा सकता है। 
  • करेंट अफेयर्स के लिए भी समाचारपत्र का पढ़ना जरूरी है। 
  • ऑब्जेक्टिव परीक्षा में एक या आधे अंक का भी खास महत्व होता है। हो सकता है कि आधा अंक कम होने की वजह से आप लिखित परीक्षा में सफल न हो सकें। इस तरह की समस्या से बचने का सरल उपाय यही है कि आप जो जानते हैं, उन्हें ही हल करें। इस रणनीति से लक्ष्य तक पहुंचना आसान रहेगा। 
  • कम समय में अधिक से अधिक प्रश्नों को सही-सही हल करने के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस सेट बनाने की जरूरत है। इसके लिए निरंतर अभ्यास के अलावा कोई विकल्प नहीं है। 
  • पीओ की परीक्षा को बिल्कुल टफ न मानें। सिलेबस के अनुसार, आप तैयारी आप कर रहे हैं। अपने आपसे हमेशा कहें कि जो कुछ भी पूछा जाएगा, वह सिलेबस से ही तो पूछा जाएगा। 
  • चूंकि बैंक की सभी परीक्षाओं में निगेटिव मार्किग का प्रावधान है, इसलिए उत्तर पुस्तिका में गोल खाना भरते समय सावधानी बरतें। जब तक आप पूरी तरह संतुष्ट न हो जाएं (कि आपका उत्तर सही है), तब तक उन खानों को न भरें। जिस उत्तर के प्रति आप पूरी तरह आस्त हों (कि यही सही उत्तर है), उसी को भरें क्योंकि यदि आप गलत उत्तर भरेंगे तो आपको सही के लिए मिला अंक भी काट लेंगे। 
  • अकसर विद्यार्थियों को लगता है कि कम खाएंगे तो नींद कम आएगी। नींद कम आएगी तो ज्यादा पढ़ पाएंगे। ऐसा सोचना गलत है। विद्यार्थी को अपनी डाइट कम नहीं करनी चाहिए। हां, बाजार का खाना बंद कर घर का बना खाना खायें। नींद पूरी लें जिससे जब भी जागें, आप तरोताजा महसूस करें। इससे पढ़ाई अच्छी होगी।
  • पढ़ने के साथ-साथ लिखने का भी निरंतर अभ्यास करते रहें। 
  • घर में खुद के लिए परीक्षा जैसा माहौल बनाकर अपने को अभ्यस्त कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि स्टडी के दौरान न तो बार-बार सीट से उठें और न ही उस दौरान किसी से फोन पर बात करें। 
 

Tuesday, September 4

अनाज भंडारण से जुड़ने के मौके

अनाज भंडारण से जुड़ने के मौके

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की स्थापना अनाज भंडारण के लिए की गई है। सार्वजनिक वितरण पण्राली के लिए खाद्यान्नों तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भंडारण और किसानों के लिए प्रभावी समर्थन मूल्य की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी इसी पर है। इसके सामान्य, लेखा, तकनीकी और डिपो डिपार्टमेंट के लिए जुड़ना मायने रखता है। सहायक ग्रेड-थ्री के लिए 6,545 पदों की बहाली के लिए खाद्य निगम संयुक्त परीक्षा आयोजित कर रहा है

शैक्षिक योग्यता 
सामान्य सहायक और डिपो सहायक के लिए स्नातक होना जरूरी है। लेखा सहायक के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी के पास बी.कॉम की डिग्री होनी चाहिए, जबकि तकनीकी सहायक पद के लिए आवे दन करने वाले अभ्यर्थी को एग्रीकल्चर, बॉटनी, जूलोजी, बॉयोटेक्नोलॉजी, बॉयोकेमेस्ट्री, माइक्रो-बॉयोलॉजी, फूड साइंस विषयों से बीएससी उत्तीर्ण होना चाहिए। फूड साइंस, फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग, बॉयोटेक्नोलॉजी विषय से बीटेक या बीई करने वाले विद्यार्थी भी तकनीकी सहायक पद के लिए आवेदन कर सकते हैं।

चयन प्रक्रिया
सहायक ग्रेड-थ्री की भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में होगी। पहले चरण में पेपर एक की लिखित परीक्षा है। पेपर एक के तहत ऑब्जेक्टिव टाइप के 200 सवाल पूछे जाएंगे। दूसरे चरण में शॉर्ट लिस्टेड अभ्यर्थी ही परीक्षा देंगे। इसमें भी प्रश्न ऑब्जेक्टिव टाइप के ही होंगे। इसमें क्वांटिटेटिव (गणित) और इंग्लिश लैग्वेज और कॉम्प्रेहेन्शन से सवाल पूछे जाएंगे। तकनीकी सहायक के अभ्यर्थी को पेपर दो की जगह पेपर तीन की परीक्षा देनी होगी। इसमें भी ऑब्जेक्टिव प्रश्न होंगे। एक-एक अंक के दो सौ प्रश्न बॉयोलॉजिकल साइंस से जुड़े प्रश्न होंगे। तीसरे चरण के तहत सहायक ग्रेड-थ्री के सभी पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को कम्प्यूटर प्रोफिशिएंसी टेस्ट (सीपीटी) की परीक्षा देनी होगी। यह क्वालिफाइंग नेचर की परीक्षा है। फाइनल सलेक्शन फाइनल सलेक्शन पेपर एक और पेपर दो के प्राप्तांकों को जोड़कर होगा। केवल तकनीकी सहायक के लिए पेपर एक और पेपर तीन के प्राप्तांकों को जोड़कर अंतिम चयन किया जाएगा। सिलेबस पेपर वन और पेपर दो का सिलेबस हायर सेकेंडरी लेबल का है जबकि पेपर थ्री का लेवल ग्रेजुएट स्तर का होगा।

पहले पेपर में अधिक अंक लाने के लिए जनरल इंटेलिजेंस के अंतर्गत रिलेशनशिप कॉन्सेप्ट, समानता और अंतर, समस्या का समाधान, मूल्यांकन, निर्णय क्षमता, चित्रों का वर्गीकरण जैसे वर्बल, कोडिंग और डिकोडिंग, वाक्यनि ष्कर्ष इत्यादि पर अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी। अंग्रेजी मजबूत करने के लिए इंग्लिश वोकेबलरी, ग्रामर, सेंटेंस स्ट्रक्चर, सिनोनिम्स, एंटोनिम्स और अंग्रेजी में राइटिंग स्किल पर ध्यान देना होगा। क्वांटिटेटिव एप्टीटय़ूड से संबंधित प्रश्नों का उत्तर आप तभी दे पाएंगे जब अर्थमैटिक,
अल्जेब्रा, ज्योमैट्री, मेनसुरेशन, ट्रिग्नोमेट्री, स्टेटिस्टिकल चार्ट्स आदि पर आपकी पकड़ मजबूत रहेगी। जनरल अवेयरनेस की तैयारी के लिए आपको करेंट इंवेट के साथ भारत तथा इसके पड़ोसी देशों के खेल, इतिहास, संस्कृति, भूगोल, राजनीति, साइंटिफिक रिसर्च, भारतीय संविधान इत्यादि से संबंधित ज्ञान होना चाहिए। दूसरे पेपर के लिए आपको दसवीं और बारहवीं स्तर के गणितीय सवालों और अंग्रेजी पर पकड़ मजबूत करना होगा।

कैसे करें तैयारी
  • ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्नों के लिए टाइम मैनेजमेंट जरूरी है। इसलिए इसको तैयार करते वक्त शुरू से समय का ध्यान रखें। जितनी ज्यादा आप प्रैक्टिस करेंगे, परीक्षा के दौरान आपको उतना ही फायदा होगा। 
  • परीक्षा में सबसे पहले उन्हीं प्रश्नों को हल करें, जिनका उत्तर आप अच्छी तरह से जानते हैं। यदि आप किसी प्रश्न में उलझे तो काफी समय बर्बाद होगा। जिनके जवाब जानते होंगे, उनके भी जवाब नहीं दे पाएंगे। 
  • जनरल इंटेलिजेंस एवं न्यूमेरिकल एप्टीट्यूड, अंग्रेजी और जनरल अवेयरनेस की अपेक्षा अधिक समय लेते हैं। इस कारण परीक्षा के दौरान कोशिश होनी चाहिए कि अंग्रेजी और जनरल अवेयरनेस को कम समय दें।
  • करेंट अफेयर्स की तैयारी हमेशा करें। यदि सिर्फ एक घंटे इसको देंगे तो रोज नई घटनाओं या खेलों से अवगत होते रहेंगे और परीक्षा तक तैयारी हो जाएगी। 
  • स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं की मदद से राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक, खेल गतिविधियों एवं पुरस्कार, चर्चित व्यक्ति, आदि का नियमित अध्ययन करें। 
  • एनसीईआरटी की पुस्तकों से भारतीय इतिहास, संस्कृति, राज्य व्यवस्था, भूगोल, अर्थव्यवस्था आदि को पढ़ें और अपना बेसिक मजबूत करें। 
  • तर्कशक्ति पर आधारित अभ्यास प्रश्नपत्रों को ज्यादा से ज्यादा हल करने की प्रैक्टिस करें। प्रश्नों को तेज गति से हल करने की क्षमता में वृद्धि होगी। 
  • मैथ्स की तैयारी के लिए हायर सेकेंडरी स्तर की किताबों की सहायता से विभिन्न टाइप के सवालों को समझें। उन्हें तेजी से और सही-सही हल करने की तकनीक विकसित करें।

Friday, August 31

भविष्य को करें डिजाइन

भविष्य को करें डिजाइन आज की लाइफस्टाइल में कपड़ों से लेकर फुटवियर तक में लोग मैचिंग चाहते हैं। बाजार में रोज नए-नए डिजाइन के उत्पाद आ रहे हैं। यह नयापन कभी कलर तो कभी डिजाइन में दिखता है। इस कारण डिजाइनिंग का क्रेज दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। प्रोफेशनल्स जूलरी डिजाइन, ग्राफिक डिजाइनिंग, सिरैमिक एंड ग्लास डिजाइनिंग, इंटीरियर डिजाइनिंग, फैशन डिजाइनिंग तथा ऑ टोमोबाइल डिजाइनिंग के क्षेत्र में नया लुक देते हैं।

कॉमन इंट्रेंस एक्जामिनेशन फॉर डिजाइन-2012

अगर आप प्रोफेशन डिजाइनर बनना चाहते हैं, तो कई बेहतरीन मौके इंतजार कर रहे हैं। ऐसा ही मौका लेकर आया है, कॉमन इंट्रेंस एग्जामिनेशन फॉर डिजाइन यानी सीईईडी। इसकी परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों के स्कोर के मुताबिक इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू से लेकर आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर, आईआईटी मुंबई, आईआईटी गुवाहाटी जैसे संस्थानों में प्रोडक्ट डिजाइन एंड इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल डिजाइन, विजुअल कम्युनिकेशन, एनिमेशन, इलेस्ट्रेशन डिजाइन, डिजाइन में मास्टर डिग्री पाठय़क्रम के लिए दाखिला लिया जा सकता है। कई संस्थान इसी परीक्षा के स्कोर के आधार पर डिजाइन पाठय़क्रमों में पीएचडी करने का भी मौका देते हैं।

योग्यता
कॉमन इंट्रेंस एक्जामिनेशन फॉर डिजाइन अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है। इसके लिए अभ्यर्थी की शैक्षिक योग्यता इंजीनियरिंग/आर्किटेक्चर/ डिजाइन/इंटीरियर डिजाइन में चार वर्षीय स्नातक, चार वर्षीय प्रोफेशनल डिप्लोमा इन डिजाइन (एनआईडी/सीईपीटी) या इसके समकक्ष, चार वर्षीय बैचलर इन फाइन आर्ट्स या फिर आर्ट्स/साइंस/कंप्यूटर एप्लिकेशन में मास्टर डिग्री होना जरूरी है। इसके लिए उम्र की कोई सीमा निर्धारित नहीं है।

परीक्षा केंद्र
बेंगलुरू, चेन्नई, कानपुर, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, गुवाहाटी

चयन प्रक्रिया
यह परीक्षा तीन घंटे की होगी। प्रश्नपत्र दो भागों में होगा। पहला भाग स्क्रीनिंग टेस्ट है जबकि दूसरा भाग स्कोरिंग है। प्रश्नपत्र की भाषा अंग्रेजी होगी। पहले भाग के प्रश्नों का उत्तर ऑनलाइन जबकि दूसरा पेपर ऑफलाइन होगा। परीक्षार्थी को दोनों भागों के सभी प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य है। पहले चरण में विजुअल परसेप्शन एबिलिटी, ड्राइंग स्किल, लॉजिकल रीजनिंग, क्रिएटिव एंड कम्युनिकेशन स्किल, फंडामेंटल डिजाइन, डिजाइन से संबंधित प्रॉब्लम सॉल्विंग कैपेसिटी आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। जनरल एबिलिटी में इंग्लिश कॉम्प्रिहेंशन, एनालिटिकल एबिलिटी, कम्युनिकेशन एबिलिटी के साथ विज्ञान और गणित के सवाल पूछे जाते हैं। करेंट अफेयर्स में देश-विदेश की ताजा खबरों के अलावा, प्रसिद्ध हस्तियों और साल भर की मुख्य घटनाओं से जुड़े हुए प्रश्नों को पूछा जा सकता है। दूसरे चरण में अभ्यर्थी की क्रिएटिविटी और फैशन के प्रति लगाव की परख के लिए सिचुएशन टेस्ट लिया जाता है। इस टेस्ट के माध्यम से स्टूडेंट्स की डिजाइनिंग के प्रति सोच, नए आइडिया, कल्पनाशक्ति और अलग हटकर सोचने और डिजाइन करने के लिए प्रेरित किया जाता है। प्रश्नपत्र के दूसरे भाग की कॉपी केवल उन्हीं परीक्षार्थियों की जांची जाएगी, जो पहले भाग में न्यूनतम कट ऑफ मार्क्‍स लाएंगे। प्रश्नपत्र के दूसरे भाग की कॉपी जांचने के बाद, इसी भाग के प्राप्तांकों के आधार पर मेरिट लिस्ट और उत्तीर्ण परीक्षार्थियों की सूची बनाई जाएगी।

कैसे करें तैयारी
इसकी तैयारी अन्य परीक्षाओं से काफी अलग है। इसमें विद्यार्थियों को रट्टा लगाने से सफलता नहीं मिल सकती है। इसमें कामयाब होने के लिए मौलिकता की सख्त दरकार होती है। अभ्यर्थियों का डिजाइनिंग के प्रति रुझान, उसके प्रति उनकी समझ, विचारों व समस्या को सु लझाने की क्षमता को परखा जाता है। ऐसे में बेहतर करने के लिए जरूरी है कि आप जो भी बनाएं, उसे इलेस्ट्रेशन एवं शब्दों के माध्यम से समझाने की भी क्षमता रखें। सामान्य ज्ञान, सामान्य अध्ययन, अंग्रेजी, तर्क क्षमता आदि की अच्छी समझ भी जरूरी है। तस्वीरें बहुत कुछ कहती हैं। यह मानवीय क्रियाओं जैसे बैठना, खेलना, हंसना, रोना, खाना आदि का भी प्रदर्शन करती हैं। एग्जाम के लिए मानवीय क्रियाओं की विभिन्न मुद्राओं को बनाने का अभ्यास अवश्य करें। कम्युनिकेशन और विजुअलाइजेशन एक-दूसरे के पूरक हैं। कम्युनिकेशन ऐसा होना चाहिए कि जैसे शब्द दृश्य का कार्य करें और दृश्य शब्दों के पूरक हों। इसमें संवाद, स्लोगन और कॉपी राइटिंग महत्वपूर्ण है। आपमें सृजनात्मक सोच, कुछ नया करने का हुनर, ताजातरीन घटनाओं की जानकारी, बेहतर प्लानिंग और लीक से हटकर काम करने का जुनून हो। इस तरह के गुण इसलिए जरूरी हैं क्योंकि ये लोग वस्तुओं व उत्पादों की डिजाइन तय करते हैं। अगर आपके पास मौलिक सोच है और अपनी सोच को डिजाइन के माध्यम से कहने में सफल होते हैं, तो सफलता के चांस बढ़ जाते हैं। बेहतर होगा कि आप परीक्षा में अपनी नई सोच को खुले मन से तवज्जो दें , क्यों कि यदि आपने 30 फीसद भी रचनात्मक कार्य किया है, तो माना जाता है कि आपमें डिजाइनिंग कौशल है।

Wednesday, August 29

कमाई का जरिया बना योग


रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ते तनाव और बदलती जीवन शैली के कारण लोगों में शारीरिक और मनोवैज्ञानिक समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। इन समस्याओं के निदान के लिए योग सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। मेडिकल साइंस भी योग की ताकत को स्वीकार करता है। योग ‘फिट है तो हिट है’ की तर्ज पर कार्य करता है। लोग सेहत के प्रति जागरूक हो रहे हैं और योग प्रशिक्षक और फिटनेस इंस्ट्रक्टर की सेवाएं ले रहे हैं। अगर आप स्वास्थ्य और फिटनेस में रुचि रखते हैं तो आपके लिए योग करियर का बेहतर विकल्प बन सकता है

योग साइंस में बीएससी 
मो रारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय के आयुष विभाग की स्वायत्त संस्था है। इस संस्थान में विज्ञान में स्नातक (योग विज्ञान) यानी बीएससी (योग विज्ञान) की पढ़ाई करने के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इस पाठय़क्रम में 60 सीटें हैं। पाठय़क्रम की अवधि तीन साल है, जिसे छह सेमेस्टरों में बांटा गया है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से संबद्ध संस्था है।

शैक्षिक योग्यता :
इस पाठय़क्रम में दाखिला लेने के लिए शैक्षिक योग्यता विज्ञान (भौतिकी, रसायन विज्ञान व जीव विज्ञान) विषयों से बारहवीं (सीबीएसई के पाठय़क्रम या उसके समकक्ष) में पचास फीसद अंकों के साथ उत्तीर्ण होना जरूरी है। बारहवीं में भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान तीनों विषयों में अलग-अलग पचास फीसद अंक होना अनिवार्य है।

उम्र :
बीएससी (योग विज्ञान) में दाखिला लेने के इच्छुक छात्रों की उम्र एक अगस्त 2012 को 21 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उम्र में छूट गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के नियमानुसार मिलेगी।

चयन प्रक्रिया :
प्राप्त आवेदन के बारहवीं की परीक्षा में मिले प्राप्तांक के आधार पर मेधावी सूची बनाई जाएगी। इसी सूची के आधार पर पहली सितम्बर को पहला कट ऑफ लिस्ट जारी होगा। तीन से पांच सितम्बर को दाखिले के लिए काउंसिलिंग की जाएगी। सीटें फुल नहीं होने पर दूसरा कट ऑफ लिस्ट पां च सितम्बर की शाम को जारी किया जाएगा। फिर दूसरी काउंसिलिंग छह से सात सितम्बर को होगी।
 

शिक्षक : सम्मान भी रोजगार भी


यदि आपको बच्चों से लगाव है और उन्हें आप पढ़ाना चाहते हैं तो शिक्षक बनकर अपनी इस इच्छा को पूरी कर सकते हैं। शिक्षकों को हर युग में आदर के साथ देखा गया है और किसी भी बच्चे पर उसके शिक्षक का काफी प्रभाव होता है। हालांकि ब्लॉक स्तर से लेकर केंद्र सरकार के स्तर तक स्कूल संचालित किये जाते हैं। इन स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अब चयन प्रक्रिया अपनाई जाने लगी है और संबंधित परीक्षा पास करने के बाद ही शिक्षक बना जा सकता है

केंद्र सरकार के अधीनस्थ विद्यालयों में शिक्षक बनने की राह खोलने वाली सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीटीईटी) 2012 के लिए सीबीएसई ने ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। सीबीएसई और सीटीईटी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थियों को स्कोर कार्ड के साथ प्रमाणपत्र दिया जाएगा, उसकी मान्यता सात साल रहेगी। इस प्रमाणपत्र के आधार पर केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, केंद्रीय तिब्बत विद्यालय के अलावा केंद्र शासित प्रदेश के अधीनस्थ स्कूलों में रिक्त शिक्षक पदों को भरा जाएगा यानी इन स्कूलों में सीटीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की ही शिक्षक के पदों पर नियुक्ति होगी।

परीक्षा शुल्क
सीटीईटी में दो प्रश्नपत्र है। एक पेपर की परीक्षा देने के लिए सामान्य वर्ग और ओबीसी को पांच सौ रुपए जबकि एससी, एसटी और विकलांगों के लिए 250 रुपए का ड्राफ्ट जमा करना होगा। दोनों पेपर की परीक्षा देने के लिए सामान्य वर्ग और ओबीसी को आठ सौ रुपए जबकि अन्य के लिए 400 रुपए का ड्रफ्ट देना होगा। ड्राफ्ट राष्ट्रीकृत बैंक का होना चाहिए। ड्राफ्ट सचिव, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के नाम से बनेगा और भुगतान दिल्ली में होगा।

शैक्षिक योग्यता पहले पेपर के लिए बारहवीं उत्तीर्ण के साथ दो साल का शिक्षा में डिप्लोमा होना जरूरी है जबकि दूसरे पेपर के लिए स्नातक उत्तीर्ण के साथ दो साथ का शिक्षा में डिप्लोमा या एक वर्षीय बीएड की डिग्री अनिवार्य है।

परीक्षा देश के विभिन्न प्रदेशों के 88 जिलों में 18 नवंबर 2012 को दो पाली में परीक्षा आयोजित होगी। पहले पेपर की परीक्षा पहली पाली में 10.30 से 12 बजे तक और दूसरे पेपर की परीक्षा दूसरी पाली में 1.30 से तीन बजे तक होगी। परीक्षा का माध्यम हिंदी या अंग्रेजी है। कम से कम साठ फीसद सही उत्तर देने वाले अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र दिया जाता है। यह प्रमाणपत्र सात साल के लिए मान्य रहेगा।

परीक्षा पाठय़क्रम
सीटीईटी की परीक्षा में दो पेपर है। पहला पेपर उन उम्मीदवारों के लिए है, जो प्राइमरी लेवल पर एक से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं, जबकि दूसरा पेपर छह से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने का सर्टिफिकेट प्रदान करता है। उम्मीदवार चाहें तो दोनों पेपरों के लिए आवेदन कर सकते हैं। दो नों ही पेपरों में पूछे जाने वाले प्रश्न वस्तुनिष्ठ टाइप होंगे तथा डेढ़ घंटे का समय निर्धारित होगा। दोनों पेपरों में 150 प्रश्न पूछे जाएंगे। दोनों पेपरों के लिए निर्धारित अंक 150-150 अंक है। पहले पेपर में पांच सेक्शन हैं और सभी सेक्शन के अंक बराबर हैं। इन सेक्शनों में बाल विकास एवं म्ा न्ााे िव्ा ™ाा न्ा , लैंग्वेज एक व दो (हिंदी व अंग्रेजी), गणित, पर्यावरणीय अध्ययन शामिल है। दूसरा पेपर सेक्शन और अंक विभाजन के रूप में पहले से थोड़ा अलग है। इसमें चार सेक्शन हैं। तीन सेक्शन बाल विकास एवं मनोविज्ञान (अनिवार्य), लैंग्वेज एक व दो (अनिवार्य) के लिए तीस-तीस अंक निर्धारित है जबकि चौथे सेक्शन के लिए 60 अंक निर्धारित हैं। चौथे सेक्शन के प्रश्न आर्ट और साइंस विषय के शिक्षकों के लिए अलग-अलग हैं।

बाल विकास एवं मनोविज्ञान
इसके तहत छह से ग्यारह साल तक बच्चों को पढ़ाने और सीखने की क्षमता पर आधारित प्रश्न होते हैं। इसमें मुख्य रूप से बच्चों में क्रमबद्ध विकास, विकास के लिए आवश्यक चीजें, शैक्षिक मनोविज्ञान, भाषा एवं विचार, तार्किक शक्ति तथा सामाजिक संरचना आदि पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।

लैंग्वेज एक व दो
 लैंग्वेज एक का नेचर चुने गए माध्यम पर निर्भर करता है। इसमें मुख्यत: पैसेज, ड्रामा, ग्रामर, वर्बल एबिलिटी के प्रश्न होते हैं जबकि लैं ग्वेज दो में इसके एलिमेंट, कम्युनिकेशन एवं कॉम्प्रिेहेंशन के प्रश्न होते हैं। शिक्षा पर आधारित प्रश्न भी होंगे।

गणित व पर्यावरण
गणित के प्रश्नों में औसत, लाभ-हानि, प्रतिशत, लघुत्तम व महत्तम समापवर्त क, चक्रवृ द्धि ब्याज, साधारण ब्याज, त्रिकोणमिति, सांख्यिकी आदि होते हैं, जबकि पर्यावरण अध्ययन में उसके सिद्धांत, पढ़ाई के तरीके तथा विभिन्न गतिविधियों पर फोकस किया जाता है।

सामाजिक विज्ञान/सामान्य अध्ययन
समस्या निर्धारण, कौशल, सामाजिक सरोकारों से जुड़े प्रश्नों के अलावा इतिहास, भूगोल, संविधान से संबंधित प्रश्न होंगे। कुछ प्रश्न करेंट अफेयर्स से भी पूछे जाते हैं।

तैयारी के टिप्स प्रश्नों को हल करते समय स्पीड पर ध्यान रखें क्योंकि परीक्षा में 150 प्रश्नों के लिए मात्र 90 मिनट का समय दिया जाता है। इसमें निगेटिव मार्किग नहीं है, इसलिए अधिक से अधिक प्रश्नों को हल करने का प्रयास करें। परीक्षा का स्तर अधिक से अधिक बारहवीं के समकक्ष होगा। मैथ्स के बेसिक क्लीयर रखें, जरूरी लगे तो एक बार नौवीं और दसवीं के मैथ्स का अभ्यास कर लें। भाषा पर पकड़ और कौशल के लिए ग्रामर आदि पर ध्यान हो ना चाहिए। रीजनिंग पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। बारहवीं तक की एनसीईआरटी पुस्तकें परीक्षा में राम बाण साबित होंगी।

Sunday, August 26

जुडें गुप्तचर एजेंसी से

अगर अपने आप पर भरोसा, हिम्मत और अपराध से लड़ने का साहस व देश-भक्ति का जज्बा है तो जासूसी का करियर आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है। इसके लिए बेहतरीन अवसर लेकर आयी है गुप्तचर एजेंसी आईबी यानी इंटेलिजेंस ब्यूरो। यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीनस्थ संस्था है

लिखित परीक्षा : 23 सितम्बर, 2012

इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी में ग्रेड-दो के तहत केंद्रीय सहायक इंटेलिजेंस अधिकारी के कुल 750 (सामान्य 80, ओबीसी 334, एससी 225 और एसटी 111) पद रिक्त हैं। इसके लिए ऑ नलाइन आवेदन मांगे गए हैं। ऑनलाइन आवेदन गृ ह मंत्रालय की वेबसाइट ध््रध््रध््र.थ््रण्ठ्ठ.दत्ड़.त्द के जरिए किया जा सकता है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 अगस्त, 2012 है। शैक्षिक योग्यता आवेदक को किसी भी मान्यता प्राप्त विविद्यालय से स्नातक या उसके समतुल्य पाठय़क्रम में उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। साथ ही, कम्प्यूटर की जानकारी होना वांछनीय है। उम्र अभ्यर्थी की उम्र आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 अगस्त, 2012 को 27 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। ओबीसी, एससी और एसटी के अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा में छूट केंद्र सरकार के नियमानुकूल है। नाम और जन्म तिथि के लिए मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट ही मान्य है।

परीक्षा शुल्क
 सामान्य और ओबीसी अभ्यर्थी के लिए परीक्षा शुल्क एक सौ रुपए निर्धारित है। एससी, एसटी और सभी वर्ग की महिला अभ्यर्थी से परीक्षा शुल्क नहीं लिया जायेगा। आवेदन आवेदन केवल ऑनलाइन ही होगा। इसके लिए, गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर जाना होगा। आवेदन की प्रक्रिया दो चरणों में है। पहले चरण में आपको अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षिक योग्यता और अन्य जानकारी देनी होगी। पहला चरण पूरा होने के बाद एक यूनीक रजिस्ट्रेशन आईडी मिलेगा। इसकी स्लिप आपके ई-मेल पर भी भेजी जाएगी। दूसरे चरण में केवल परीक्षा शुल्क भुगतान करना है। परीक्षा शुल्क भुगतान आप ऑनलाइन कर सकते हैं। भारतीय स्टेट बैंक की इंटरनेट बैंकिंग सेवा या फिर एसबीआई का डेबिट कार्ड आप इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा भी फीस जमा करने के कई विकल्प हैं। भविष्य में पत्राचार करने की जरूरत हुई तो रजिस्ट्रेशन आईडी का उल्लेख करना जरूरी है, इसलिए रजिस्ट्रेशन आईडी, कैश पैमेंट स्लिप को संभालकर रखें। ई-मेल और मो बाइल पर परीक्षा के एडमिट कार्ड के लिए अलर्ट भेजा जा सकता है। इसलिए जो भी मोबाइल नं बर और ईमे ल आईडी आपने ऑनलाइन आवेदन करते समय दिया, वह कम से कम छह माह तक वैध रखना जरूरी है। परीक्षा 33 के 33 केंद्रों पर होगी और एक बार विकल्प चुन लेने के बाद, उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता। लिखित परीक्षा/ साक्षात्कार के लिए केवल बेरोजगार एससी/ एसटी अभ्यर्थियों के लिए यात्रा- भत्ता की व्यवस्था है।

चयन प्रक्रिया 
केंद्रीय सहायक इंटेलिजेंस अधिकारी पद की चयन-प्रक्रिया दो चरणों में है लिखित परीक्षा और साक्षात्कार। पहले चरण में लिखित परीक्षा एक घंटे 40 मिनट की है। इसमें प्रश्नपत्र दो तरह के होंगे। पहले प्रश्नपत्र में बहुवैकल्पिक वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे। इसके तहत सामान्य अध्ययन, सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी, रीजनिंग और गणित विषय संबंधी प्रश्न हों गे। दूसरा प्रश्नपत्र विवरणात्मक होगा जो अंग्रेजी भाषा पर आधारित होगा। लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर साक्षात्कार के लिए मे धावी अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जायेगा। साक्षात्कार के लिए चयनित अभ्यर्थियों का नाम वेबसाइट पर डिस्प्ले किया जाएगा और चयनित अभ्यर्थी को साक्षात्कार के लिए बुलावा-पत्र भेजा जाएगा।


कैसे करें तैयारी 
1. जनरल नॉलेज की तैयारी के लिए हर दिन कम से कम अंग्रेजी का एक राष्ट्रीय समाचारपत्र जरूर पढ़ें।
2. चूंकि एसीआईओ की परीक्षा अंग्रेजी भाषा पर आधारित है, इसलिए बाजार में उपलब्ध प्रतियोगिता परीक्षा से संबंधित अंग्रेजी पत्रिकाएं जरूर पढ़ें।
3. अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल की खबरों पर नजर रखें। इससे वैिक जानकारी बढ़ने के साथ- साथ आपका जनरल नॉलेज बढ़ेगा।
4. अंग्रेजी पेपर हल करने में वोकेबलरी काफी मायने रखती है। इसलिए अपनी वोकेबलरी को इम्प्रूव करें। इसके लिए अंग्रेजी समाचार पत्र-पत्रिकाओं और किताबें पढ़ने की जरूरत है।
5. कंप्रीहेंसिव पैसेज को हल करने की आदत डालें।
6. गणित के पेपर में बेहतर अंक तभी आएंगे जब आप ट्रिक्स अपनाएंगे।
7. प्रैक्टिस पेपर से जमकर प्रैक्टिस करें।

रिकॉर्ड प्रबंधन और रिप्रोग्राफी में जॉब

रिकॉर्ड प्रबंधन और रिप्रोग्राफी में जॉब

ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार का प्रतिष्ठित संग्रहालय है- राष्ट्रीय अभिलेखागार। यहां आजादी से पूर्व और बाद के सभी अमूल्य अभिलेख सहेजे गये हैं। यहां नौकरियों के अवसर मिलते रहते हैं। इसके लिए आज कोर्स भी संचालित किये जाते हैं

राष्ट्रीय अभिलेखागार की स्थापना मार्च 1891 में कोलकाता में हुई। देश की राजधानी दिल्ली बनाये जाने के बाद दिल्ली के लुटियंस जोन में जहां राजपथ और जनपथ का मिलन होता है, वहां इसका मुख्यालय बनाया गया। देश के पुरातत्व और राष्ट्रीय अभिले ख की रक्षा करने की जिम्मेदारी इस संस्थान की है। 1941 से यहां अभिलेखों को सुरक्षित और संरक्षित करने का प्रशिक्षण दिया जाने लगा। संस्थान के रूप में राष्ट्रीय अभिलेखागार 1976 से विकसित किया गया। 1980 में इसका नाम रखा गया- अभिलेखीय अध्ययन का शिक्षालय (स्कूल ऑफ आर्काइवल स्टडीज)। अभिलेख के संरक्षण और पुस्तकालय को बेहतर बनाने की मांग को देखते हुए अभिलेखागार अभिलेखाध्यक्षों, रिकॉ र्ड प्रबं धकों, अभिलेख संरक्षित करने वालों, माइक्रो- फोटो ग्राफिक्स आदि को सैद्धांतिक और प्रायोगिक तरीके से प्रशिक्षण देता है। प्रशिक्षण के दौरान सेमिनार, वर्कशॉप आदि आयोजित किये जाते हैं। इसके अतिरिक्त, अग्रणी संस्थानों और विविद्यालयों के प्रतिष्ठित अभिलेखाध्यक्षों और रिकॉर्ड प्रबंधकों आदि के व्याख्यान भी प्रशिक्षण के दौरान सुनने को मिलते हैं। अभिलेखीय अध्ययन शिक्षालय में अभिलेख एवं रिकार्ड प्रबंधन में एकवर्षीय डिप्लोमा संचालित किया जाता है। यह प्रोफेशनल स्तर का प्रशिक्षण है। इसके अलावा, इस संस्थान में अभिलेख प्रबंधन- पुस्तक, पांडुलिपि और अभिलेख संरक्षण और उनकी देखभाल, रिकॉर्ड प्रबंधन, रेप्रोग्राफी तथा रिकॉर्ड के संरक्षण और मरम्मत आदि पर शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में, अभिलेखीय अध्ययन शिक्षालय ने रिकॉर्ड प्रबंधन में 75वां शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स और रेप्रोग्राफी में 66वां शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स के लिए आवेदन मांगे हैं।

पाठय़क्रम 
 रिकॉर्ड प्रबंधन में 75वीं शॉर्ट टर्म कोर्स का प्रशिक्षण तीन से 28 सितम्बर 2012 तक दिया जाएगा। इस कोर्स का उद्देश्य आवेदक के रिकॉर्ड को सही तरीके से रखना, उसे व्यवस्थित करना आदि है। इस प्रशिक्षण को पाने के लिए आवेदक को किसी भी मान्यता प्राप्त विविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण होना जरूरी है। संस्था द्वारा प्रायोजित आवेदक की उम्र सीमा पचास साल है जबकि स्वत: आवेदन करने वाले की अधिकतम उम्र तीस साल होनी चाहिए। उम्र में छूट सरकार के नियमानुसार दी जायेगी। रेप्रोग्राफी में 66वां शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स का प्रशिक्षण 10 से 19 सितम्बर 2012 तक दिया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रशिक्षु को अभिलेख, लघु फिल्म, पांडुलिपि औ र संग्रहीत सूचना आदि के पुनरुत्पादन- प्रक्रिया, संचालन, पुनरुद्धार और प्रसार-संबंधी प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण के लिए आवेदक को मान्यता प्राप्त विविद्यालय से द्वितीय श्रेणी में स्नातक उत्तीर्ण होना चाहिए। विज्ञान की पढ़ाई करने वाले आवेदकों को वरीयता दी जायेगी।

आवेदन
दोनों शॉर्ट टर्म में आवेदन करने के लिए पहले पंजीयन कराना होता है। पंजीयन कराने के लिए आवेदक को आवेदन के साथ शैक्षिक योग्यता प्रमाणपत्र की प्रमाणित फोटोकॉपी के अलावा प्रशासनिक अधिकारी, राष्ट्रीय अभिलेखागार के नाम से एक सौ रुपए का ड्राफ्ट या रेखांकित किया हुआ इंडियन पोस्टल ऑर्डर महानिदेशक (अभिलेख), राष्ट्रीय अभिलेखागार, जनपथ, नई दिल्ली-110 001 भेजना अनिवार्य है।

फीस
रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण शुल्क दो सौ रुपए हैं जबकि रेप्रोग्राफी के लिए तीन सौ रुपए दाखिले के समय देना होगा। एक बार भुगतान हो जाने के बाद शुल्क वापस नहीं होगा।

छात्रावास और भोजन
संस्थान प्रशिक्षण के दौरान छात्रावास और भोजन की व्यवस्था नहीं कराता। इसे अपने पास से करना होता है।
दाखिले की अधिक जानकारी के लिये संपर्क करें। संपर्क समय सुबह साढ़े नौ से शाम छह बजे तक है। महानिदेशक (अभिलेख) राष्ट्रीय अभिलेखागार जनपथ, नई दिल्ली-110 001 दूरभाष:011-23388557

मौसम विज्ञान भी देता है कई मौके

मौसम विज्ञान भी देता है कई मौके

मौसम की चाल कभी सीधी नहीं होती। दिनोंदिन बढ़ते प्रदूषण और घटते जंगलों के कारण धरती के तापमान में बदलाव और प्रकृति के दोहन ने मौसम के मिजाज को और बिगाड़ दिया है। यही कारण है कि प्राकृतिक आपदाएं कहर ढा रही हैं। कहीं बाढ़, कहीं सूखा तो कहीं मानसून की आंखमिचौ ली। मौसम से जुड़े सारे तथ्यों की जानकारी मौसम विज्ञान में आती है। इस विषय में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए मौसम विज्ञान में करियर बनाना आसान है और रोमांचकारी भी क्योंकि मौसम विज्ञान मूलत: भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित का समावेश है।

विषय का महत्व
मौसम विज्ञान में भले ही कई अनिश्चितताओं का अध्ययन होता हो, लेकिन आज के दौर में मौसम-संबंधी पूर्वानुमान केवल पानी बरसने की सूचना या तापमान के उतार- चढ़ाव बताने तक सीमित नहीं है। मौसम का पूर्वानुमान सिर्फ कृषि जगत के लिए ही उपयोगी नहीं है, बल्कि पर्यटन, उड्डयन, चिकित्सा, निर्माण, समुद्री यात्रा आदि में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। तभी तो मौसम विज्ञान के पाठय़क्रमों में विविधता है। यह व्यापक विषय भी है।

पाठय़क्रम
मौसम विज्ञान में पाठय़क्रमों की विविधता और उसकी उपयोगिता के कारण मौसम विज्ञान की शाखाओं का विस्तार हुआ है। मसलन कृषि मौसम विज्ञान, भौतिकी मौसम विज्ञान, डायनामिक मौसम विज्ञान, व्यावहारिक मौसम विज्ञान, सायनोप्टिक मौसम विज्ञान और जलवायु विज्ञान आदि। इस तरह मौसम में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के पास विषय की विविधता स्पष्ट है।

प्रवेश
मौसम विज्ञान से जुड़े पाठय़क्रमों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता बारहवीं है। विद्यार्थियों के भौतिकी और गणित में कम से कम 55 फीसद अंक होने अनिवार्य हैं। मेधावी छात्रों को पाठय़क्रम प्रवेश में वरीयता दी जाती है। आमतौर पर मौसम विज्ञान से संबंधित पाठय़क्रमों में अंकों के आधार पर दाखिला मिल जाता है। कुछ विविद्यालयों में लिखित परीक्षा के आधार पर दाखिला मिलता है। मौसम विज्ञान से संबंधित पाठय़क्रम बीएससी, एमएससी और कहीं-कहीं पीएचडी स्तर तक है। कुछ संस्थान मौसम विज्ञान में डिप्लोमा भी कराते हैं। इन सभी पाठय़क्रमों में गणित, सांख्यिकी और भौतिकी पर विशेष बल दिया जाता है। जो विद्यार्थी केवल विषय ही नहीं, पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी दिखाते हैं और जिन्हें मौसम के छिपे रहस्यों से पर्दा हटाने की लालसा रहती है, वे इस प्रकार के पाठय़क्रमों में विशेष रूप से सफलता अर्जित करते हैं। पाठय़क्रम पूरा करने के बाद करियर के लिए विषय से जुड़ी अन्य जानकारी रखना तो अनिवार्य है ही, अपनी जानकारी को हमेशा अप-टू-डेट रखना भी जरूरी है। मसलन, पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में छाई ब्राउन हेज, मानसून से जुड़ी घटना, अल्नीनो, कैटरीना इफेक्ट आदि की जानकारी पाठय़क्रम की कामयाबी करियर के लिए जरूरी है।

अवसर
मौसम विज्ञान से जुड़े पाठय़क्रमों को पूरा करने के बाद नौकरी का ज्यादा बड़ा दायरा सरकारी क्षेत्र में ही है, क्योंकि मौसम-संबंधी सूचना जारी करने का सारा कामकाज सरकारी नियंतण्रमें है। करियर के लिहाज से निजी क्षेत्र में भी अब मौसम विशेषज्ञों को रखा जाने लगा है। निजी क्षेत्र की कुछ कंपनियां अपने स्तर पर मौसम-संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए मौसम विशेषज्ञ को रखती हैं, विशेष रूप से पर्यटन और निर्माण के क्षेत्र की निजी कंपनियां। भारतीय मौसम विभाग में समय-समय पर मौसम की विविध शाखाओं से जुड़ी नियुक्तियों की मांग रहती है। इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करता है। इनमें बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स), एमएससी (भौतिकी/ इलेक्ट्रॉनिक), एमएससी (गणित) के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। इन नियुक्तियों के लिए मौसम विज्ञान से एमएससी करने वाले विद्यार्थी भी आवे दन कर सकते हैं।

Tuesday, August 9

सटीक निर्णय देने का दायित्व


यदि आप राजस्थान की सामाजिक विविधताओं को समझते हैं और विवाद को तार्कि क और सटीक मत के जरिए सुलझाने में रुचि रखते हैं तो आपके लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) मौका दे रही है सिविल जज (जूनियर) बनने का। एक सौ एक रिक्त पदों के लिए इच्छुक उम्मीदवार आरपीएससी की वेबसाइट पर 25 अगस्त, 2011 तक ऑनलाइन आवेदनकर सकते हैं

अर्हताएं: उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विविद्यालय से अधिवक्ता अधिनियम 1961 के तहत मान्य एलएलबी की डिग्री होनी चाहिए। साथ ही उम्मीदवार को राजस्थानी भाषा, लीपि और परिवेश की समझ होनी चाहिए। आवेदन करने वाले की उम्र पहली जनवरी, 2012 को कम से कम 23 साल लेकिन 35 साल से अधिक न हो। आरक्षण और उम्र सीमा में छूट का लाभ सरकारी प्रावधानों के अनुसार दी जाएगी।

चयन प्रक्रिया: चयन प्रक्रिया तीन स्तरीय प्रतियोगिता के माध्यम से होगी- प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। साक्षात्कार में सफल होने पर उम्मीदवार को राजस्थान न्यायिक सेवा के तहत (न्यायिक) डय़ूटी दी जाएगी।

पहला चरण : प्रारंभिक परीक्षा इसमें बहुवैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएंगे। मुख्य परीक्षा के दो प्रश्न पत्र लॉ- प्रथम और लॉ-द्वितीय से संबंधित होंगे। प्रारंभिक परीक्षा में इन दोनों प्रश्नपत्रों से 70 फीसद प्रश्न होंगे। शेष 30 फीसद प्रश्न हिंदी और अंग्रेजी भाषा संबंधी प्रश्न होंगे। इसमें प्राप्त अंकों के आधार पर कैटेगरी वाइज मेधावी सूची बनाई जाएगी। रिक्त पदों की कुल संख्या का पन्द्रह गुणो उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चयन किया जाएगा। सफल उम्मीदवारों को दोबारा फार्म भरने होंगे, जो आरपीएससी से मुफ्त मिलेंगे।

दूसरा चरण : मुख्य परीक्षा मुख्य परीक्षा में चार प्रश्नपत्र होंगे। इसमें दो प्रश्नपत्र सौ-सौ अंकों के लॉ संबंधी हों गे। तीसरा प्रश्नपत्र हिंदी निबंध पचास अंकों का और चौथा प्रश्नपत्र अंग्रेजी निबंध का होगा। सभी के प्रश्न सब्जेक्टिव/ नरेटिव टाइप होंगे।

पहला प्रश्नपत्र लॉ प्रथम : इसमें भारतीय संविधान, सिविल प्रोसिजर कोड, लॉ ऑफ कांट्रेक्ट एंड पार्टनरशिप, लॉ ऑफ टोर्ट एंड एसेसमेंट, लॉ ऑफ मोटर एक्सीडेंट क्लेम, लॉ ऑफ अरबिट्रेशन, रेंट कंट्रोल लॉ, राजस्थान का रेवन्यू लॉ, लॉ ऑफ स्पेसिफिक लॉ, हिंदू लॉ, मुस्लिम लॉ, लॉ ऑफ ट्रांसफर प्रॉपर्टी, लॉ ऑफ लिमिटेशन, लॉ ऑफ लोक अदालत और स्थायी लोक अदालत, घरेलू हिंसा संबं धी नियम आदि संबंधी प्रश्न पूछे जाएंगे।

दूसरा प्रश्न पत्र सिविल लॉ सेकेंड : इसके तहत क्रिमिनल प्रोसिजर कोड, लॉ ऑफ एविडेंस कोड, आईपीसी, लॉ ऑफ नारकोटिक ड्रग, एससी/एसटी संबंधी प्रोटेक्शन क्रिमिनल लॉ, बाल अपराध नियम, चेक डिसऑनर संबंधी नियम, बिजली चोरी संबंधी नियम, साइबर क्राइम, सामान्य अपराध और जजों के आदेश संबंधी प्रश्न हों गे। दोनों प्रश्नपत्रों के सिलेबस की प्रैक्टिकल जानकारी उम्मीवारों को होनी चाहिए।

तीसरा प्रश्न हिंदी निबंध : इसके अंतर्गत हिंदी लेखन क्षमता और व्याकरण संबंधी प्रश्न होंगे।

चौथा प्रश्न पत्र अंग्रेजी (निबंध/लेख) : इस प्रश्नपत्र में अंग्रेजी लेखन, अनुवाद हिंदी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिंदी, ग्रामर को परखा जाएगा। मुख्य परीक्षा के सभी प्रश्नपत्रों की परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है। पहले और दूसरे प्रश्नपत्रों में न्यूनतम 35 फीसद अंक लाना अनिवार्य है। सभी प्रश्नपत्रों के पूर्णाक 300 का 40 फीसद यानी 120 अंक और उससे अधिक प्राप्तांक लाने वाले उम्मीदवारों की मेधावी सूची कैटेगरी वाइज बनाई जाएगी। एसटी/एससी उम्मीदवारों के लिए प्राप्तांक में पांच फीसद की छूट दी गई है। मेधावी सूची के आधार पर रिक्त पदों की कुल संख्या के तीन गुणो उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

तीसरा चरण : इंटरव्यू इंटरव्यू के बाद कैटेगरी वाइज मेधावी सूची बनाई जाएगी और रिक्त पदों की संख्या के अनुसार मेधावी उम्मीदवारों का चयन कर लिया जाएगा।

Tuesday, July 19

राजस्थान जाएं , पढ़ाएं


राजस्थान में बनिए वरिष्ठ अध्यापक (प्रारंभिक)

आप यदि राजस्थानी संस्कृति में रचे बसे हैं और आप शिक्षा क्षेत्र से जुड़ना चाहते हैं तो राजस्थान लोक सेवा आयोग ने प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक (प्रारंभिक) के लिए 4,326 पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। इसमें 1,963 पद सामान्य वर्ग के लिए है।

अर्हताएं
शैक्षिक योग्यता : इच्छुक उम्मीदवार को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विविद्यालय से किसी भी विषय से स्नातक या उसके समतुल्य परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहिए और राजस्थान सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त शिक्षा में उपाधि या डिप्लोमा भी जरूरी है।
अनुभव : पांच वर्ष अध्यापन का अनुभव होना चाहिए। इच्छुक उम्मीदवार को देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी का व्यावहारिक ज्ञान एवं राजस्थान की संस्कृति का ज्ञान होना चाहिए।
उम्र सीमा : आवेदक की उम्र पहली जनवरी, 2012 को 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए और न ही 35 साल से अधिक। आरक्षण और उम्र में छूट केवल राजस्थान के निवासियों के लिए है। परीक्षा केंद्र : आवेदकों की संख्या के आधार पर राजस्थान के जिला मुख्यालयों पर परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। परीक्षा अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह या सितम्बर माह में लिया जाएगा।

चयन प्रक्रिया
लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों की कैटेगरी वाइज मेधावी सूची बनाई जाएगी। इसी मेधावी सूची के आधार पर मैरिट में आए उम्मीदवारों से सभी रिक्त पदों को भरा जाएगा। लिखित परीक्षा के तहत दो पेपर हैं। पहला प्रश्नपत्र दो सौ अंकों का है और दूसरा प्रश्नपत्र तीन सौ अंकों का है।

प्रथम प्रश्नपत्र : इसमें एक सौ प्रश्न बहुवैकल्पिक होंगे। इसके लिए दो घंटे निर्धारित किया गया है। यह चार भागों में बांटा गया है। पहले भाग में राजस्थान की भौगोलिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामान्य जानकारी संबंधी प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके लिए 80 अंक निर्धारित किये गये हैं। दूसरे भाग में राजस्थान की समसामायिक घटनाओं से संबंधी प्रश्न पूछे जाएंगे, इसके लिए 20 अंक निर्धारित है। तीसरे भाग में वि और भारत की सामान्य जानकारी संबंधी प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके लिए 60 अंक निर्धारित किये गये हैं। प्रश्न पत्र का चौथा भाग 40 अंक का है। इस भाग में शिक्षा से जुड़े मनोविज्ञान संबंधी प्रश्न पूछे जाएंगे।

दूसरा प्रश्नपत्र : यह प्रश्नपत्र इच्छुक उम्मीदवार के विषय से संबंधित है। इसके लिए ढाई घंटे निर्धारित किये गये हैं। इसमें डेढ़ सौ अंकों के लिए बहुवैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएंगे। शेष अंकों के लिए प्रश्न लघुत्तरीय और दीर्घउत्तरीय होंगे। इस प्रश्नपत्र को तीन भागों में बांटा गया है। पहले भाग में सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्तर के विषय संबंधी जानकारी पूछे जाएंगे, इसके लिए 180 अंक निर्धारित किया गया है। दूसरे भाग में स्नातक स्तरीय प्रश्न विषय संबंधी होंगे। इसके लिए 80 अंक निर्धारित किये गये हैं, जबकि तीसरे भाग में संबंधित विषय को पढ़ाने के तरीके को समझने के लिए प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके लिए 40 अंक निर्धारित किये गये हैं।

रणनीति

  • परीक्षा में सफलता के लिए सबसे पहले लिखित परीक्षा के सिलेबस को गहराई से समझना जरूरी है।
  • सिलेबस को समझने के बाद रुटीन बनाकर तैयारी करनी चाहिए।
  • लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्र महत्वपूर्ण हैं। किसी को भी कमतर आंकना ठीक नहीं है।
  • लिखित परीक्षा के प्रथम प्रश्नपत्र में राजस्थान संबंधी सौ अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे। इसे ध्यान में रखते हुए ‘राजस्थान : एक परिचय‘ संबंधी पु स्तक पढ़ना जरूरी है।
  • बारहवीं तक की एनसीईआरटी की पुस्तकों को रिवाइज करने से लिखित परीक्षा में काफी हद तक मदद मिलेगी।
  • समसामायिक घटनाओं की जानकारी को अपडेट रखने के लिए राष्ट्रीय स्तर के समाचारपत्र के अलावा प्रतियोगिता पत्रिकाओं की नियमित पढ़ाई जरूरी है।
  • पढ़ाई करते समय महत्वपूर्ण तत्थों को नोट करना चाहिए और नोट किए तत्थों को रोजाना देखना चाहिए
  • चूंकि नियुक्ति राजस्थान प्रदेश के लिए है, इसके लिए जरूरी है राजस्थान संबंधी समसामायिक घटनाओं, नियुक्तियों संबंधी प्रश्नों के अलावा, राजस्थान से संबंधित तमाम जानकारियों पर पकड़ बनानी चाहिए।

दीपक राजा