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Thursday, June 26

व्यक्तित्व नहीं समग्र विकास को समझने की जरूरत है मोदी मंत्र


पुस्तक कोई भी हो, उससे अगर बड़े स्तर पर लोगों को जानकारी मिले, वैसी जानकारी जिससे कि लोगों की सोच में साकारात्मक बदलाव आए। फिर लेखक का काम सार्थक हो जाता है। एसबी क्रिएटिव मीडिया द्वारा प्रकाशित आैर वरिष्ठ टीवी पत्रकार हरीश चंद्र बरनवाल द्वारा लिखित पुस्तक मोदी मंत्र इसी श्रेणी की पुस्तक है। यह पुस्तक नरेंद्र मोदी के उन पक्षों को उजागर करता है जो नरेंद्र मोदी को नमो बनाता है।

16वें लोकसभा के सिरमौर नरेंद्र मोदी हैं। इससे असहमत शायद ही कोई हो। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से तीन बार से लगातार गुजरात सरकार का नेतृत्व करने वाले भाजपा नेता नरेंद्र मोदी अब देश के प्रधानमंत्री हैं। वह एक ऐसा व्यक्ति जिसे सुप्रीम कोर्ट तक में घसीटा गया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गोधरा कांड के लिए दोषी घोषित नहीं किया गया। यह आैर बात है कि उनकेे विरोधी आज भी उसी गोधराकांड पर अटके हुए हैं जबकि वह मीलों आगे बढ़ चुके हैं। ऐसे व्यक्ति आैर उसके व्यक्ति, उसकी सोच आैर उसके कार्यशैली को समझने की बड़ी जरूरत है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए 'मोदी मंत्र" पुस्तक काफी हद तक सहायक हो सकता है। अपने भाषणों आैर कार्यशैली से मोदी ने जो विकास का मॉडल प्रस्तुत किया। उसे एक पत्रकार ने अपने लेखन के माध्यम से न केवल विश्लेषण किया बल्कि उसे दुनिया के सामने रखने का प्रयास किया।

आलोच्य पुस्तक के माध्यम से पाठकों को एक ऐसे नेता का परिचय मिलेगा जो न केवल तकनीक की बात करता है बल्कि मिट्टी से जुड़कर आसमान की खाक छानने की बात भी करता है। अगर गुजरात वाइब्रौंट के नाम पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होता है तो किसानों की जिंदगी बेहतर करने के लिए सब्सिडी के बजाए बेहतर सुविधा की बात होती है। मिट्टी के लिए भी मेडिकल रिपोर्ट कार्ड बनता है। शिक्षा की बात हो, तो रोजगारपरक विशेष संस्थान की बात होती है चाहे सैनिक व  सिपाही के लिए रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय हो या साइबर क्राइम पर नियंत्रण करने के लिए कौशल तैयार करने के लिए फारेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना। लोग भले मोदी को हिदुत्व नेता के रूप में देखता हो लेकिन मोदी किसी एक समुदाय की नहीं राष्ट्रीय एकता की बात करते हैं। उनके राजनीतिक आैर सामाजिक जीवन का एक ही मंत्र है, बड़े कारखाने हो लेकिन कुटीर आैर लघु उद्योग भी फले फूले। वकायदा इसके लिए भी वह सुविधा मुहैया कराते हैं आैर अवसर निकालते हैं। तभी वह 'कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में" का नारा देकर कभी गिर अभ्यारण्य की बात करते हैं तो कभी कच्छ के रण की बात करते हैं तो कभी सोमनाथ आैर लोथल की बात करते हैं।

आलोच्य पुस्तक के माध्यम से लेखक ने मोदी को देश की जनता के सामने उन अनजाने पहलूओं को सामने लाने का प्रयास किया है जिसे वर्तमान मीडिया काटछांट कर या यूं कहें कि उसे प्रकाशित आैर प्रसारित करने से बचती रही है। देश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही क्यों? इसके पीछे भी लेखक ने एक सौ एक तर्क दिए। कुछ तर्कों पर पाठक असहमत भी हो सकते हैं लेकिन तर्कों में अंतरविरोध नहीं है। लेखनी का विषय तत्कालिक होने पर भी दूरगामी परिणाम होगा।

अंत में दीपक राजा की एक कविता

हां मैं हूं वही

मैैं पागल हूं
लोगों ने घोषित किया मुझे

जब हंसता हूं, ठहाके लगा
खिल उठता है बगिया
रोता हूं अंधियारे भी में भी
तो धरती हो जाती है नम

शंखनाद हो जाता है जब
चिल्लाता हूं वेग से
फड़क उठती है भुजाएं
दिखता है जहां भी गम

हर वाजी पाने को
रेस लगाता हूं जीवन की
कुछ देर ठहरकर
छांव तले पलकों को दिया विराम

गर सपना देखना-दिखाना
पाने की आस जगाना
गलत को गलत, सही को सही बताने में
कन्नी काट रहे के कानों में
भोंपू बजाना गर पागलपन...
तो फिर इनकार कैसा
हां, मैं हूं वही
जो लोगों ने पहले से कर दिया है घोषित।

दीपक राजा

† आप पागल के स्थान पर सांप्रदायिक शब्द रखकर पढ़ सकते हैं।

Sunday, August 26

जुडें गुप्तचर एजेंसी से

अगर अपने आप पर भरोसा, हिम्मत और अपराध से लड़ने का साहस व देश-भक्ति का जज्बा है तो जासूसी का करियर आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है। इसके लिए बेहतरीन अवसर लेकर आयी है गुप्तचर एजेंसी आईबी यानी इंटेलिजेंस ब्यूरो। यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीनस्थ संस्था है

लिखित परीक्षा : 23 सितम्बर, 2012

इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी में ग्रेड-दो के तहत केंद्रीय सहायक इंटेलिजेंस अधिकारी के कुल 750 (सामान्य 80, ओबीसी 334, एससी 225 और एसटी 111) पद रिक्त हैं। इसके लिए ऑ नलाइन आवेदन मांगे गए हैं। ऑनलाइन आवेदन गृ ह मंत्रालय की वेबसाइट ध््रध््रध््र.थ््रण्ठ्ठ.दत्ड़.त्द के जरिए किया जा सकता है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 अगस्त, 2012 है। शैक्षिक योग्यता आवेदक को किसी भी मान्यता प्राप्त विविद्यालय से स्नातक या उसके समतुल्य पाठय़क्रम में उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। साथ ही, कम्प्यूटर की जानकारी होना वांछनीय है। उम्र अभ्यर्थी की उम्र आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 अगस्त, 2012 को 27 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। ओबीसी, एससी और एसटी के अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा में छूट केंद्र सरकार के नियमानुकूल है। नाम और जन्म तिथि के लिए मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट ही मान्य है।

परीक्षा शुल्क
 सामान्य और ओबीसी अभ्यर्थी के लिए परीक्षा शुल्क एक सौ रुपए निर्धारित है। एससी, एसटी और सभी वर्ग की महिला अभ्यर्थी से परीक्षा शुल्क नहीं लिया जायेगा। आवेदन आवेदन केवल ऑनलाइन ही होगा। इसके लिए, गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर जाना होगा। आवेदन की प्रक्रिया दो चरणों में है। पहले चरण में आपको अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षिक योग्यता और अन्य जानकारी देनी होगी। पहला चरण पूरा होने के बाद एक यूनीक रजिस्ट्रेशन आईडी मिलेगा। इसकी स्लिप आपके ई-मेल पर भी भेजी जाएगी। दूसरे चरण में केवल परीक्षा शुल्क भुगतान करना है। परीक्षा शुल्क भुगतान आप ऑनलाइन कर सकते हैं। भारतीय स्टेट बैंक की इंटरनेट बैंकिंग सेवा या फिर एसबीआई का डेबिट कार्ड आप इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा भी फीस जमा करने के कई विकल्प हैं। भविष्य में पत्राचार करने की जरूरत हुई तो रजिस्ट्रेशन आईडी का उल्लेख करना जरूरी है, इसलिए रजिस्ट्रेशन आईडी, कैश पैमेंट स्लिप को संभालकर रखें। ई-मेल और मो बाइल पर परीक्षा के एडमिट कार्ड के लिए अलर्ट भेजा जा सकता है। इसलिए जो भी मोबाइल नं बर और ईमे ल आईडी आपने ऑनलाइन आवेदन करते समय दिया, वह कम से कम छह माह तक वैध रखना जरूरी है। परीक्षा 33 के 33 केंद्रों पर होगी और एक बार विकल्प चुन लेने के बाद, उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता। लिखित परीक्षा/ साक्षात्कार के लिए केवल बेरोजगार एससी/ एसटी अभ्यर्थियों के लिए यात्रा- भत्ता की व्यवस्था है।

चयन प्रक्रिया 
केंद्रीय सहायक इंटेलिजेंस अधिकारी पद की चयन-प्रक्रिया दो चरणों में है लिखित परीक्षा और साक्षात्कार। पहले चरण में लिखित परीक्षा एक घंटे 40 मिनट की है। इसमें प्रश्नपत्र दो तरह के होंगे। पहले प्रश्नपत्र में बहुवैकल्पिक वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे। इसके तहत सामान्य अध्ययन, सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी, रीजनिंग और गणित विषय संबंधी प्रश्न हों गे। दूसरा प्रश्नपत्र विवरणात्मक होगा जो अंग्रेजी भाषा पर आधारित होगा। लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर साक्षात्कार के लिए मे धावी अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जायेगा। साक्षात्कार के लिए चयनित अभ्यर्थियों का नाम वेबसाइट पर डिस्प्ले किया जाएगा और चयनित अभ्यर्थी को साक्षात्कार के लिए बुलावा-पत्र भेजा जाएगा।


कैसे करें तैयारी 
1. जनरल नॉलेज की तैयारी के लिए हर दिन कम से कम अंग्रेजी का एक राष्ट्रीय समाचारपत्र जरूर पढ़ें।
2. चूंकि एसीआईओ की परीक्षा अंग्रेजी भाषा पर आधारित है, इसलिए बाजार में उपलब्ध प्रतियोगिता परीक्षा से संबंधित अंग्रेजी पत्रिकाएं जरूर पढ़ें।
3. अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल की खबरों पर नजर रखें। इससे वैिक जानकारी बढ़ने के साथ- साथ आपका जनरल नॉलेज बढ़ेगा।
4. अंग्रेजी पेपर हल करने में वोकेबलरी काफी मायने रखती है। इसलिए अपनी वोकेबलरी को इम्प्रूव करें। इसके लिए अंग्रेजी समाचार पत्र-पत्रिकाओं और किताबें पढ़ने की जरूरत है।
5. कंप्रीहेंसिव पैसेज को हल करने की आदत डालें।
6. गणित के पेपर में बेहतर अंक तभी आएंगे जब आप ट्रिक्स अपनाएंगे।
7. प्रैक्टिस पेपर से जमकर प्रैक्टिस करें।

रिकॉर्ड प्रबंधन और रिप्रोग्राफी में जॉब

रिकॉर्ड प्रबंधन और रिप्रोग्राफी में जॉब

ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार का प्रतिष्ठित संग्रहालय है- राष्ट्रीय अभिलेखागार। यहां आजादी से पूर्व और बाद के सभी अमूल्य अभिलेख सहेजे गये हैं। यहां नौकरियों के अवसर मिलते रहते हैं। इसके लिए आज कोर्स भी संचालित किये जाते हैं

राष्ट्रीय अभिलेखागार की स्थापना मार्च 1891 में कोलकाता में हुई। देश की राजधानी दिल्ली बनाये जाने के बाद दिल्ली के लुटियंस जोन में जहां राजपथ और जनपथ का मिलन होता है, वहां इसका मुख्यालय बनाया गया। देश के पुरातत्व और राष्ट्रीय अभिले ख की रक्षा करने की जिम्मेदारी इस संस्थान की है। 1941 से यहां अभिलेखों को सुरक्षित और संरक्षित करने का प्रशिक्षण दिया जाने लगा। संस्थान के रूप में राष्ट्रीय अभिलेखागार 1976 से विकसित किया गया। 1980 में इसका नाम रखा गया- अभिलेखीय अध्ययन का शिक्षालय (स्कूल ऑफ आर्काइवल स्टडीज)। अभिलेख के संरक्षण और पुस्तकालय को बेहतर बनाने की मांग को देखते हुए अभिलेखागार अभिलेखाध्यक्षों, रिकॉ र्ड प्रबं धकों, अभिलेख संरक्षित करने वालों, माइक्रो- फोटो ग्राफिक्स आदि को सैद्धांतिक और प्रायोगिक तरीके से प्रशिक्षण देता है। प्रशिक्षण के दौरान सेमिनार, वर्कशॉप आदि आयोजित किये जाते हैं। इसके अतिरिक्त, अग्रणी संस्थानों और विविद्यालयों के प्रतिष्ठित अभिलेखाध्यक्षों और रिकॉर्ड प्रबंधकों आदि के व्याख्यान भी प्रशिक्षण के दौरान सुनने को मिलते हैं। अभिलेखीय अध्ययन शिक्षालय में अभिलेख एवं रिकार्ड प्रबंधन में एकवर्षीय डिप्लोमा संचालित किया जाता है। यह प्रोफेशनल स्तर का प्रशिक्षण है। इसके अलावा, इस संस्थान में अभिलेख प्रबंधन- पुस्तक, पांडुलिपि और अभिलेख संरक्षण और उनकी देखभाल, रिकॉर्ड प्रबंधन, रेप्रोग्राफी तथा रिकॉर्ड के संरक्षण और मरम्मत आदि पर शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में, अभिलेखीय अध्ययन शिक्षालय ने रिकॉर्ड प्रबंधन में 75वां शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स और रेप्रोग्राफी में 66वां शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स के लिए आवेदन मांगे हैं।

पाठय़क्रम 
 रिकॉर्ड प्रबंधन में 75वीं शॉर्ट टर्म कोर्स का प्रशिक्षण तीन से 28 सितम्बर 2012 तक दिया जाएगा। इस कोर्स का उद्देश्य आवेदक के रिकॉर्ड को सही तरीके से रखना, उसे व्यवस्थित करना आदि है। इस प्रशिक्षण को पाने के लिए आवेदक को किसी भी मान्यता प्राप्त विविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण होना जरूरी है। संस्था द्वारा प्रायोजित आवेदक की उम्र सीमा पचास साल है जबकि स्वत: आवेदन करने वाले की अधिकतम उम्र तीस साल होनी चाहिए। उम्र में छूट सरकार के नियमानुसार दी जायेगी। रेप्रोग्राफी में 66वां शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स का प्रशिक्षण 10 से 19 सितम्बर 2012 तक दिया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रशिक्षु को अभिलेख, लघु फिल्म, पांडुलिपि औ र संग्रहीत सूचना आदि के पुनरुत्पादन- प्रक्रिया, संचालन, पुनरुद्धार और प्रसार-संबंधी प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण के लिए आवेदक को मान्यता प्राप्त विविद्यालय से द्वितीय श्रेणी में स्नातक उत्तीर्ण होना चाहिए। विज्ञान की पढ़ाई करने वाले आवेदकों को वरीयता दी जायेगी।

आवेदन
दोनों शॉर्ट टर्म में आवेदन करने के लिए पहले पंजीयन कराना होता है। पंजीयन कराने के लिए आवेदक को आवेदन के साथ शैक्षिक योग्यता प्रमाणपत्र की प्रमाणित फोटोकॉपी के अलावा प्रशासनिक अधिकारी, राष्ट्रीय अभिलेखागार के नाम से एक सौ रुपए का ड्राफ्ट या रेखांकित किया हुआ इंडियन पोस्टल ऑर्डर महानिदेशक (अभिलेख), राष्ट्रीय अभिलेखागार, जनपथ, नई दिल्ली-110 001 भेजना अनिवार्य है।

फीस
रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण शुल्क दो सौ रुपए हैं जबकि रेप्रोग्राफी के लिए तीन सौ रुपए दाखिले के समय देना होगा। एक बार भुगतान हो जाने के बाद शुल्क वापस नहीं होगा।

छात्रावास और भोजन
संस्थान प्रशिक्षण के दौरान छात्रावास और भोजन की व्यवस्था नहीं कराता। इसे अपने पास से करना होता है।
दाखिले की अधिक जानकारी के लिये संपर्क करें। संपर्क समय सुबह साढ़े नौ से शाम छह बजे तक है। महानिदेशक (अभिलेख) राष्ट्रीय अभिलेखागार जनपथ, नई दिल्ली-110 001 दूरभाष:011-23388557

मौसम विज्ञान भी देता है कई मौके

मौसम विज्ञान भी देता है कई मौके

मौसम की चाल कभी सीधी नहीं होती। दिनोंदिन बढ़ते प्रदूषण और घटते जंगलों के कारण धरती के तापमान में बदलाव और प्रकृति के दोहन ने मौसम के मिजाज को और बिगाड़ दिया है। यही कारण है कि प्राकृतिक आपदाएं कहर ढा रही हैं। कहीं बाढ़, कहीं सूखा तो कहीं मानसून की आंखमिचौ ली। मौसम से जुड़े सारे तथ्यों की जानकारी मौसम विज्ञान में आती है। इस विषय में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए मौसम विज्ञान में करियर बनाना आसान है और रोमांचकारी भी क्योंकि मौसम विज्ञान मूलत: भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित का समावेश है।

विषय का महत्व
मौसम विज्ञान में भले ही कई अनिश्चितताओं का अध्ययन होता हो, लेकिन आज के दौर में मौसम-संबंधी पूर्वानुमान केवल पानी बरसने की सूचना या तापमान के उतार- चढ़ाव बताने तक सीमित नहीं है। मौसम का पूर्वानुमान सिर्फ कृषि जगत के लिए ही उपयोगी नहीं है, बल्कि पर्यटन, उड्डयन, चिकित्सा, निर्माण, समुद्री यात्रा आदि में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। तभी तो मौसम विज्ञान के पाठय़क्रमों में विविधता है। यह व्यापक विषय भी है।

पाठय़क्रम
मौसम विज्ञान में पाठय़क्रमों की विविधता और उसकी उपयोगिता के कारण मौसम विज्ञान की शाखाओं का विस्तार हुआ है। मसलन कृषि मौसम विज्ञान, भौतिकी मौसम विज्ञान, डायनामिक मौसम विज्ञान, व्यावहारिक मौसम विज्ञान, सायनोप्टिक मौसम विज्ञान और जलवायु विज्ञान आदि। इस तरह मौसम में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के पास विषय की विविधता स्पष्ट है।

प्रवेश
मौसम विज्ञान से जुड़े पाठय़क्रमों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता बारहवीं है। विद्यार्थियों के भौतिकी और गणित में कम से कम 55 फीसद अंक होने अनिवार्य हैं। मेधावी छात्रों को पाठय़क्रम प्रवेश में वरीयता दी जाती है। आमतौर पर मौसम विज्ञान से संबंधित पाठय़क्रमों में अंकों के आधार पर दाखिला मिल जाता है। कुछ विविद्यालयों में लिखित परीक्षा के आधार पर दाखिला मिलता है। मौसम विज्ञान से संबंधित पाठय़क्रम बीएससी, एमएससी और कहीं-कहीं पीएचडी स्तर तक है। कुछ संस्थान मौसम विज्ञान में डिप्लोमा भी कराते हैं। इन सभी पाठय़क्रमों में गणित, सांख्यिकी और भौतिकी पर विशेष बल दिया जाता है। जो विद्यार्थी केवल विषय ही नहीं, पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी दिखाते हैं और जिन्हें मौसम के छिपे रहस्यों से पर्दा हटाने की लालसा रहती है, वे इस प्रकार के पाठय़क्रमों में विशेष रूप से सफलता अर्जित करते हैं। पाठय़क्रम पूरा करने के बाद करियर के लिए विषय से जुड़ी अन्य जानकारी रखना तो अनिवार्य है ही, अपनी जानकारी को हमेशा अप-टू-डेट रखना भी जरूरी है। मसलन, पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में छाई ब्राउन हेज, मानसून से जुड़ी घटना, अल्नीनो, कैटरीना इफेक्ट आदि की जानकारी पाठय़क्रम की कामयाबी करियर के लिए जरूरी है।

अवसर
मौसम विज्ञान से जुड़े पाठय़क्रमों को पूरा करने के बाद नौकरी का ज्यादा बड़ा दायरा सरकारी क्षेत्र में ही है, क्योंकि मौसम-संबंधी सूचना जारी करने का सारा कामकाज सरकारी नियंतण्रमें है। करियर के लिहाज से निजी क्षेत्र में भी अब मौसम विशेषज्ञों को रखा जाने लगा है। निजी क्षेत्र की कुछ कंपनियां अपने स्तर पर मौसम-संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए मौसम विशेषज्ञ को रखती हैं, विशेष रूप से पर्यटन और निर्माण के क्षेत्र की निजी कंपनियां। भारतीय मौसम विभाग में समय-समय पर मौसम की विविध शाखाओं से जुड़ी नियुक्तियों की मांग रहती है। इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करता है। इनमें बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स), एमएससी (भौतिकी/ इलेक्ट्रॉनिक), एमएससी (गणित) के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। इन नियुक्तियों के लिए मौसम विज्ञान से एमएससी करने वाले विद्यार्थी भी आवे दन कर सकते हैं।

Friday, December 31

संसद जाम करने से बेहतर है ... सड़क जाम

भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार हुआ कि शीतकालीन सत्र बिल्कुल भी नहीं चला। एक पर एक घोटाले के पर्दाफाश के बाद संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग पर सत्तारूढ़ पार्टियां और विपक्ष आमने-सामने रहे। संसद नहीं चलने देने का आरोप भी एक-दूसरे पर मढ़ते रहे। इसी कड़ी में कांग्रेस के वुजुर्ग नेता प्रणव मुखर्जी ने संसद नहीं चलने देने का आरोप विपक्ष पर लगाते हुए देश से माफी मांगने को कहा।

प्रणव दा वित्त मंत्री हैं और लोकसभा के नेता भी। सो संसद सत्र नहीं चलने पर उनकी चिंता बेजा नहीं है। दादा आपने बात बिल्कुल सही कहा है कि विपक्ष को संसद नहीं चलने देने की माफी मांगनी चाहिए । देश की सबसे बड़ी पंचायत ही नहीं लोकतंत्र का आधार स्तंभ भी है संसद। करोड़ों रूपए खर्च कर देश में आम चुनाव कराया जाता है, इसलिए नहीं कि किसी ए क मुद्दे पर संसद की कार्यवाही को पूरी तरह से ठप कर दी जाए ।

संसद का शीतकालीन सत्र घोटालों के नाम रही। चाहे वो 1़7६ लाख करोड़ का 2जी स्पेट्रक्म घोटाले, 3़18 करोड़ रूपए का कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला या ए क हजार करोड़ रूपए का आदर्श सोसायटी घोटाले। इसकी सच्चाई क्या है, आपसे बेहतर कौन जानता होगा! घोटाले किसके शासन में नहीं हुए ? शासन चाहे किसी भी पार्टी की रही हो, सबके शासनकाल में घोटाले हुए हैं। ए ेसी कोई पार्टी नहीं है जो कह सके कि उसके शासन में घोटाले नहीं हुए । इसके बावजूद जब राजनीतिक पार्टियां विपक्ष में होती हैं तो हाय तौबा मचाती ही है। विपक्ष में होने का मतलब ही हाय तौबा मचाना नहीं है। दादा आपने सही कहा है कि विपक्ष को घोटाले के नाम पर शीतकालीन सत्र चलने नहीं दी, इसके लिए उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए ।

आपके इस वक्तव्य से मुझे दशकों पहले अल्पायु में ही काल के गाल में समा जाने वाले कवि धूमिल की ए क कविता याद आती है। उन्होंने कहा- हे भाई/ अगर चाहते हो कि/ हवा का रूख बदले/ तो ए क काम करो/ संसद जाम करने से बेहतर है/ कि सड़क जाम करो। काश विपक्ष को धूमिल की कविता याद आ गई होती तो संसद सत्र में बाधा नहीं आती और प्रणव दा को माफी मांगने को कहने की जरूरत नहीं पड़ती। विपक्ष में बैठे राजनीतिक पार्टियों का काम संसद में केवल हंगामा करना ही काम नहीं है। घोटालों को लेकर जेपीसी सरकार गठित करने में पीछे हट रही है, इसको लेकर संसद चलने नहीं देने से क्या जेपीसी गठित हो गई। सरकार जेपीसी गठित कर भी दे तो इससे कितना र्फ पड़ेगा। घोटालों के इतिहास से तो यही लगता है कि कागजों का ए क बंडल और सरकारी रिकॉर्ड में बढ़ जाए गा। क्योंकि जेपीसी की रिपोर्ट जब तक आती लोग काफी हद तक भूल चुके होते। देश की आधी आबादी को तो पता भी नहीं होगा कि आखिर 2जी स्पेक्ट्रम किस बला का नाम है।

विपक्षी पार्टियों के लिए कितना अच्छा मौका था देश की जनता के पास जाने का। विपक्ष की राजनीतिक पार्टी के पास केवल 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला ही नहीं, आदर्श घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, स्विस बैंक में पड़े देश के अरबों काला धन से लेकर महंगाई का मुद्दा भी है जिसे लेकर आम जन के पास जाया जा सकता है। महंगाई को वो मुद्दा है जो देश के प्रत्येक नागरिक के आर्थिक पक्ष को नुकसान पहुंचाया है। पार्टियां प्रखंड स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक आंदोलन चलाती, देश के प्रत्येक नागरिक को इससे जोड़ने का प्रयास करती। इतना तय है कि सत्ता के मद में चूर लोगों को भी जनता के नाराज होने का भय सताता है। सत्ता सुख भोग रहे लोगों को पता है कि उन्हें जो सत्ता मिली है वह जनता के प्यार के कारण मिला है न की नाराजगी के कारण। वह अच्छी तरह जानते हैं कि जनता नाराज हो गई तो उन्हें सिंहासन से उतर कर पैदल होना पड़ेगा। ए ेसे में विपक्ष की मांग को मजबूरन माननी पड़ेगी।

हालांकि यह काम करने के लिए घर से बाहर निकल कर सड़क की धूल फांकनी पड़ेगी, राजधानी का सुख का परित्याग करना पड़ेगा। यहीं ए क यक्ष प्रश्न सामने आ जाता है। उस यक्ष प्रश्न को कविता के माध्यम से धूमिल ने व्यक्त किया है ‘मसला यह नहीं कि/ इसे हल कौन करेगा/ मसला यह है कि/ इसमें पहल कौन करेगा’।