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Sunday, November 6

अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला नहीं है टीवी चैनल पर एक दिन का बैन

अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला नहीं है टीवी चैनल पर एक दिन का बैन
NDTV पर सरकार ने एक दिन का बैन लगाया, उसको लेकर हो-हल्ला मचाया जा रहा है। तथाकथित बुद्धजीवियों को लग रहा है कि यह आपातकाल के दौर की आहट है। उन्हें या तो स्टंट करने में मजा आता है या किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। या फिर जिस बौद्धिकता को लेकर अपने आन पर गुस्ताखी मान रहे हैं, वह उसके लायक हैं ही नहीं। पूरे देश को पता है कि आपातकाल में पूरी मीडिया ही नहीं देश के एक-एक लोगों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को निलंबित कर दिया गया था। NDTV पर एक दिन के ऑफ एयर करना, वह भी उनकी गलत रिपोर्टिंग के कारण, आपातकाल की आहट कैसे हो सकता है। 
केंद्र सरकार ने NDTV पर सिर्फ एक दिन के लिए ऑफ एयर होने का नोटिस दिया। इतने में ही तथाकथित बुद्धजीवी बिलविला उठे। विशेषकर जो वामपंथी विचारधारा से हैं या उससे प्रभावित हैं। वामपंथी विचार को मानने वालों या उनकी ओर झुकाव रखने वालों को देश हित से कभी कोई मतलब नहीं रहा। उन्हें स्वहित सबसे प्रिय है। चाहे इसके लिए देश की सुरक्षा, अस्मिता, सामाजिक ताना-बाना जाए चूल्हे में।
एक अंतर-मंत्रालय समिति ने सरकार को NDTV पर 30 दिन के ऑफ एयर करने की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार सिर्फ मीडिया चैनल और उससे जुड़े पत्रकारों को अहसास कराना चाहती थी। इसलिए चैनल के आर्थिक पक्ष को ध्यान रखते हुए सिर्फ एक दिन का बैन लगाया। सरकार चाहती तो हूबहू शब्दश NDTV पर 30 दिनों के लिए बैन कर सकती थी लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। यह केंद्र सरकार की भलमानसी है।
इस तरह का चैनल पर बैन पहली बार नहीं लगी। पहले भी सरकारें मीडिया चैनल के प्रसारण पर रोक लगाती रही है। उसके कुछ उदाहरण -
  • 2005 में सिने वर्ल्ड में रात में एडल्ट मूवी दिखाने के कारण पूरे एक महीने के लिए बैन किया गया था।
  • 2007 में एक महीने के लिए जनमत चैनल पर एक महीने का बैन लगाया गया। उसे गलत स्टिंग चलाने का दोषी पाया था।
  • 2007 में एफटीवी और एएक्सएन को दो माह के लिए प्रतिबंधित किया गया।
  • 2015 में भारत का नक्शा गलत दिखाने पर अलजजीरा पर 5 दिन का बैन लगाया गया था।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है जिसकी व्याख्या अनुच्छेद 19 में विस्तार से की गई है। इसी के तहत पत्रकारिता यानि मीडिया से जुड़े संस्थानों और पत्रकारों को भी अधिकार प्राप्त है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी को भी, कुछ भी बोलने, प्रदर्शन करने या फिर प्रसारण करने का अधिकार नहीं है। संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है स्वच्छंदता का नहीं। अनुच्छेद 19 के अनुसार, राज्य के पास संविधान और कानूनों के तहत इस स्वतंत्रता को नियंत्रित करने का अधिकार है। कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे- बाह्य या आंतरिक आपातकाल, राष्ट्रीय सुरक्षा आदि।

एनडीटीवी पर एक दिन के लिए बैन को लेकर जिस तरह से हायतौबा मचा है, विधवा विलाप हो रहा है। इसको राजनीतिक रंग देने में जुटा एक खास गुट है, जो कभी जेएनयू में भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे को भी अभिव्यक्ति की आजादी मान रहे थे। स्वतंत्रता के नाम पर कभी देवी-देवताओं की नग्न पेटिंग्स बनाई जाती है। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर, लोकतंत्र के नाम पर भौड़े प्रदर्शन को जनता समझ रही है। 
-© दीपक कुमार 

Sunday, February 14

‘वैलेंटाइन डे’ ... त्योहार

निजी चैनल के एक इंटरव्यू में ‘विवादों की रानी’ के नाम से विख्यात आइटम गर्ल राखी सावंत ने कहा है कि लोग पसंद करें या नापसंद करें पर मुझे देखते सभी हैं। वैलेंटाइन डे के साथ भी कुछ ऐसा ही है। श्रीराम सेना, शिव सेना, बजरंग दल जैसे तमाम संगठन और उसके कार्यकर्ता चाहे जितना चिल्लम पो मचा लें, लेकिन सच यही है कि वैलेंटाइन डे पर हर तबके के लोगों ने अपने-अपने तरीके से अपने प्रेम का इजहार किया है।

प्यार करने वालों के लिए ‘वैलेंटाइन डे’ ठीक वैसा ही त्योहार है जैसे कि हम अपने आराध्य के लिए धूमधाम से साल में एक दिन करते हैं। भगवान गणेश के लिए गणपति बप्पा मोरया करते हैं तो आदिशक्ति दुर्गा के लिए दशहरा मनाते हैं। प्रेम करने वालों के लिए भी वैसा ही एक त्योहार है, एक दिन है जहां हम अपने प्यार करने वालों को अपने दिल की बात कहते हैं। उसके लिए पूरा एक दिन समय देते हैं।

साल में एक बार ऐसा अवसर आता है जब हर कोई सोचता है कि हम किसे चाहते-मानते है और कौन हमें मानता और चाहता है। ... इसे चाहे आप इजहार-ए -मोहब्बत कहें या फिर जुनून-ए-इश्क। ढाई आखर का प्रेम कभी भी किसी से हो सकता है।

वैलेंटाइन डे का विरोध करने वाले भी ऐसा नहीं है कि किसी से प्यार नहीं करते हैं। वह भी प्यार करते हैं मगर सभ्य होकर। पार्क और रेस्टोरेंट में बैठकर गलबहियां और चुम्मा-चाटी नहीं करते। हमें लगता है कि वैलेंटाइन डे के विरोधी वह भी नहीं है। वह विरोधी हैं तो प्यार और उसके इजहार के तरीके से जिसे भौड़ा प्रदर्शन कहा जा सकता है। भौड़ा प्रदर्शन को बढ़ावा बाजार ने दिया है। मुनाफाखोरों को जहां मुनाफा देखते हैं, वहीं नंगा नाच करते हैं और कराते भी है।