Sunday, August 26

जुडें गुप्तचर एजेंसी से

अगर अपने आप पर भरोसा, हिम्मत और अपराध से लड़ने का साहस व देश-भक्ति का जज्बा है तो जासूसी का करियर आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है। इसके लिए बेहतरीन अवसर लेकर आयी है गुप्तचर एजेंसी आईबी यानी इंटेलिजेंस ब्यूरो। यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीनस्थ संस्था है

लिखित परीक्षा : 23 सितम्बर, 2012

इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी में ग्रेड-दो के तहत केंद्रीय सहायक इंटेलिजेंस अधिकारी के कुल 750 (सामान्य 80, ओबीसी 334, एससी 225 और एसटी 111) पद रिक्त हैं। इसके लिए ऑ नलाइन आवेदन मांगे गए हैं। ऑनलाइन आवेदन गृ ह मंत्रालय की वेबसाइट ध््रध््रध््र.थ््रण्ठ्ठ.दत्ड़.त्द के जरिए किया जा सकता है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 अगस्त, 2012 है। शैक्षिक योग्यता आवेदक को किसी भी मान्यता प्राप्त विविद्यालय से स्नातक या उसके समतुल्य पाठय़क्रम में उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। साथ ही, कम्प्यूटर की जानकारी होना वांछनीय है। उम्र अभ्यर्थी की उम्र आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 अगस्त, 2012 को 27 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। ओबीसी, एससी और एसटी के अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा में छूट केंद्र सरकार के नियमानुकूल है। नाम और जन्म तिथि के लिए मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट ही मान्य है।

परीक्षा शुल्क
 सामान्य और ओबीसी अभ्यर्थी के लिए परीक्षा शुल्क एक सौ रुपए निर्धारित है। एससी, एसटी और सभी वर्ग की महिला अभ्यर्थी से परीक्षा शुल्क नहीं लिया जायेगा। आवेदन आवेदन केवल ऑनलाइन ही होगा। इसके लिए, गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर जाना होगा। आवेदन की प्रक्रिया दो चरणों में है। पहले चरण में आपको अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षिक योग्यता और अन्य जानकारी देनी होगी। पहला चरण पूरा होने के बाद एक यूनीक रजिस्ट्रेशन आईडी मिलेगा। इसकी स्लिप आपके ई-मेल पर भी भेजी जाएगी। दूसरे चरण में केवल परीक्षा शुल्क भुगतान करना है। परीक्षा शुल्क भुगतान आप ऑनलाइन कर सकते हैं। भारतीय स्टेट बैंक की इंटरनेट बैंकिंग सेवा या फिर एसबीआई का डेबिट कार्ड आप इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा भी फीस जमा करने के कई विकल्प हैं। भविष्य में पत्राचार करने की जरूरत हुई तो रजिस्ट्रेशन आईडी का उल्लेख करना जरूरी है, इसलिए रजिस्ट्रेशन आईडी, कैश पैमेंट स्लिप को संभालकर रखें। ई-मेल और मो बाइल पर परीक्षा के एडमिट कार्ड के लिए अलर्ट भेजा जा सकता है। इसलिए जो भी मोबाइल नं बर और ईमे ल आईडी आपने ऑनलाइन आवेदन करते समय दिया, वह कम से कम छह माह तक वैध रखना जरूरी है। परीक्षा 33 के 33 केंद्रों पर होगी और एक बार विकल्प चुन लेने के बाद, उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता। लिखित परीक्षा/ साक्षात्कार के लिए केवल बेरोजगार एससी/ एसटी अभ्यर्थियों के लिए यात्रा- भत्ता की व्यवस्था है।

चयन प्रक्रिया 
केंद्रीय सहायक इंटेलिजेंस अधिकारी पद की चयन-प्रक्रिया दो चरणों में है लिखित परीक्षा और साक्षात्कार। पहले चरण में लिखित परीक्षा एक घंटे 40 मिनट की है। इसमें प्रश्नपत्र दो तरह के होंगे। पहले प्रश्नपत्र में बहुवैकल्पिक वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे। इसके तहत सामान्य अध्ययन, सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी, रीजनिंग और गणित विषय संबंधी प्रश्न हों गे। दूसरा प्रश्नपत्र विवरणात्मक होगा जो अंग्रेजी भाषा पर आधारित होगा। लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर साक्षात्कार के लिए मे धावी अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जायेगा। साक्षात्कार के लिए चयनित अभ्यर्थियों का नाम वेबसाइट पर डिस्प्ले किया जाएगा और चयनित अभ्यर्थी को साक्षात्कार के लिए बुलावा-पत्र भेजा जाएगा।


कैसे करें तैयारी 
1. जनरल नॉलेज की तैयारी के लिए हर दिन कम से कम अंग्रेजी का एक राष्ट्रीय समाचारपत्र जरूर पढ़ें।
2. चूंकि एसीआईओ की परीक्षा अंग्रेजी भाषा पर आधारित है, इसलिए बाजार में उपलब्ध प्रतियोगिता परीक्षा से संबंधित अंग्रेजी पत्रिकाएं जरूर पढ़ें।
3. अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल की खबरों पर नजर रखें। इससे वैिक जानकारी बढ़ने के साथ- साथ आपका जनरल नॉलेज बढ़ेगा।
4. अंग्रेजी पेपर हल करने में वोकेबलरी काफी मायने रखती है। इसलिए अपनी वोकेबलरी को इम्प्रूव करें। इसके लिए अंग्रेजी समाचार पत्र-पत्रिकाओं और किताबें पढ़ने की जरूरत है।
5. कंप्रीहेंसिव पैसेज को हल करने की आदत डालें।
6. गणित के पेपर में बेहतर अंक तभी आएंगे जब आप ट्रिक्स अपनाएंगे।
7. प्रैक्टिस पेपर से जमकर प्रैक्टिस करें।

रिकॉर्ड प्रबंधन और रिप्रोग्राफी में जॉब

रिकॉर्ड प्रबंधन और रिप्रोग्राफी में जॉब

ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार का प्रतिष्ठित संग्रहालय है- राष्ट्रीय अभिलेखागार। यहां आजादी से पूर्व और बाद के सभी अमूल्य अभिलेख सहेजे गये हैं। यहां नौकरियों के अवसर मिलते रहते हैं। इसके लिए आज कोर्स भी संचालित किये जाते हैं

राष्ट्रीय अभिलेखागार की स्थापना मार्च 1891 में कोलकाता में हुई। देश की राजधानी दिल्ली बनाये जाने के बाद दिल्ली के लुटियंस जोन में जहां राजपथ और जनपथ का मिलन होता है, वहां इसका मुख्यालय बनाया गया। देश के पुरातत्व और राष्ट्रीय अभिले ख की रक्षा करने की जिम्मेदारी इस संस्थान की है। 1941 से यहां अभिलेखों को सुरक्षित और संरक्षित करने का प्रशिक्षण दिया जाने लगा। संस्थान के रूप में राष्ट्रीय अभिलेखागार 1976 से विकसित किया गया। 1980 में इसका नाम रखा गया- अभिलेखीय अध्ययन का शिक्षालय (स्कूल ऑफ आर्काइवल स्टडीज)। अभिलेख के संरक्षण और पुस्तकालय को बेहतर बनाने की मांग को देखते हुए अभिलेखागार अभिलेखाध्यक्षों, रिकॉ र्ड प्रबं धकों, अभिलेख संरक्षित करने वालों, माइक्रो- फोटो ग्राफिक्स आदि को सैद्धांतिक और प्रायोगिक तरीके से प्रशिक्षण देता है। प्रशिक्षण के दौरान सेमिनार, वर्कशॉप आदि आयोजित किये जाते हैं। इसके अतिरिक्त, अग्रणी संस्थानों और विविद्यालयों के प्रतिष्ठित अभिलेखाध्यक्षों और रिकॉर्ड प्रबंधकों आदि के व्याख्यान भी प्रशिक्षण के दौरान सुनने को मिलते हैं। अभिलेखीय अध्ययन शिक्षालय में अभिलेख एवं रिकार्ड प्रबंधन में एकवर्षीय डिप्लोमा संचालित किया जाता है। यह प्रोफेशनल स्तर का प्रशिक्षण है। इसके अलावा, इस संस्थान में अभिलेख प्रबंधन- पुस्तक, पांडुलिपि और अभिलेख संरक्षण और उनकी देखभाल, रिकॉर्ड प्रबंधन, रेप्रोग्राफी तथा रिकॉर्ड के संरक्षण और मरम्मत आदि पर शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में, अभिलेखीय अध्ययन शिक्षालय ने रिकॉर्ड प्रबंधन में 75वां शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स और रेप्रोग्राफी में 66वां शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स के लिए आवेदन मांगे हैं।

पाठय़क्रम 
 रिकॉर्ड प्रबंधन में 75वीं शॉर्ट टर्म कोर्स का प्रशिक्षण तीन से 28 सितम्बर 2012 तक दिया जाएगा। इस कोर्स का उद्देश्य आवेदक के रिकॉर्ड को सही तरीके से रखना, उसे व्यवस्थित करना आदि है। इस प्रशिक्षण को पाने के लिए आवेदक को किसी भी मान्यता प्राप्त विविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण होना जरूरी है। संस्था द्वारा प्रायोजित आवेदक की उम्र सीमा पचास साल है जबकि स्वत: आवेदन करने वाले की अधिकतम उम्र तीस साल होनी चाहिए। उम्र में छूट सरकार के नियमानुसार दी जायेगी। रेप्रोग्राफी में 66वां शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स का प्रशिक्षण 10 से 19 सितम्बर 2012 तक दिया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रशिक्षु को अभिलेख, लघु फिल्म, पांडुलिपि औ र संग्रहीत सूचना आदि के पुनरुत्पादन- प्रक्रिया, संचालन, पुनरुद्धार और प्रसार-संबंधी प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण के लिए आवेदक को मान्यता प्राप्त विविद्यालय से द्वितीय श्रेणी में स्नातक उत्तीर्ण होना चाहिए। विज्ञान की पढ़ाई करने वाले आवेदकों को वरीयता दी जायेगी।

आवेदन
दोनों शॉर्ट टर्म में आवेदन करने के लिए पहले पंजीयन कराना होता है। पंजीयन कराने के लिए आवेदक को आवेदन के साथ शैक्षिक योग्यता प्रमाणपत्र की प्रमाणित फोटोकॉपी के अलावा प्रशासनिक अधिकारी, राष्ट्रीय अभिलेखागार के नाम से एक सौ रुपए का ड्राफ्ट या रेखांकित किया हुआ इंडियन पोस्टल ऑर्डर महानिदेशक (अभिलेख), राष्ट्रीय अभिलेखागार, जनपथ, नई दिल्ली-110 001 भेजना अनिवार्य है।

फीस
रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण शुल्क दो सौ रुपए हैं जबकि रेप्रोग्राफी के लिए तीन सौ रुपए दाखिले के समय देना होगा। एक बार भुगतान हो जाने के बाद शुल्क वापस नहीं होगा।

छात्रावास और भोजन
संस्थान प्रशिक्षण के दौरान छात्रावास और भोजन की व्यवस्था नहीं कराता। इसे अपने पास से करना होता है।
दाखिले की अधिक जानकारी के लिये संपर्क करें। संपर्क समय सुबह साढ़े नौ से शाम छह बजे तक है। महानिदेशक (अभिलेख) राष्ट्रीय अभिलेखागार जनपथ, नई दिल्ली-110 001 दूरभाष:011-23388557

मौसम विज्ञान भी देता है कई मौके

मौसम विज्ञान भी देता है कई मौके

मौसम की चाल कभी सीधी नहीं होती। दिनोंदिन बढ़ते प्रदूषण और घटते जंगलों के कारण धरती के तापमान में बदलाव और प्रकृति के दोहन ने मौसम के मिजाज को और बिगाड़ दिया है। यही कारण है कि प्राकृतिक आपदाएं कहर ढा रही हैं। कहीं बाढ़, कहीं सूखा तो कहीं मानसून की आंखमिचौ ली। मौसम से जुड़े सारे तथ्यों की जानकारी मौसम विज्ञान में आती है। इस विषय में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए मौसम विज्ञान में करियर बनाना आसान है और रोमांचकारी भी क्योंकि मौसम विज्ञान मूलत: भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित का समावेश है।

विषय का महत्व
मौसम विज्ञान में भले ही कई अनिश्चितताओं का अध्ययन होता हो, लेकिन आज के दौर में मौसम-संबंधी पूर्वानुमान केवल पानी बरसने की सूचना या तापमान के उतार- चढ़ाव बताने तक सीमित नहीं है। मौसम का पूर्वानुमान सिर्फ कृषि जगत के लिए ही उपयोगी नहीं है, बल्कि पर्यटन, उड्डयन, चिकित्सा, निर्माण, समुद्री यात्रा आदि में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। तभी तो मौसम विज्ञान के पाठय़क्रमों में विविधता है। यह व्यापक विषय भी है।

पाठय़क्रम
मौसम विज्ञान में पाठय़क्रमों की विविधता और उसकी उपयोगिता के कारण मौसम विज्ञान की शाखाओं का विस्तार हुआ है। मसलन कृषि मौसम विज्ञान, भौतिकी मौसम विज्ञान, डायनामिक मौसम विज्ञान, व्यावहारिक मौसम विज्ञान, सायनोप्टिक मौसम विज्ञान और जलवायु विज्ञान आदि। इस तरह मौसम में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के पास विषय की विविधता स्पष्ट है।

प्रवेश
मौसम विज्ञान से जुड़े पाठय़क्रमों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता बारहवीं है। विद्यार्थियों के भौतिकी और गणित में कम से कम 55 फीसद अंक होने अनिवार्य हैं। मेधावी छात्रों को पाठय़क्रम प्रवेश में वरीयता दी जाती है। आमतौर पर मौसम विज्ञान से संबंधित पाठय़क्रमों में अंकों के आधार पर दाखिला मिल जाता है। कुछ विविद्यालयों में लिखित परीक्षा के आधार पर दाखिला मिलता है। मौसम विज्ञान से संबंधित पाठय़क्रम बीएससी, एमएससी और कहीं-कहीं पीएचडी स्तर तक है। कुछ संस्थान मौसम विज्ञान में डिप्लोमा भी कराते हैं। इन सभी पाठय़क्रमों में गणित, सांख्यिकी और भौतिकी पर विशेष बल दिया जाता है। जो विद्यार्थी केवल विषय ही नहीं, पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी दिखाते हैं और जिन्हें मौसम के छिपे रहस्यों से पर्दा हटाने की लालसा रहती है, वे इस प्रकार के पाठय़क्रमों में विशेष रूप से सफलता अर्जित करते हैं। पाठय़क्रम पूरा करने के बाद करियर के लिए विषय से जुड़ी अन्य जानकारी रखना तो अनिवार्य है ही, अपनी जानकारी को हमेशा अप-टू-डेट रखना भी जरूरी है। मसलन, पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में छाई ब्राउन हेज, मानसून से जुड़ी घटना, अल्नीनो, कैटरीना इफेक्ट आदि की जानकारी पाठय़क्रम की कामयाबी करियर के लिए जरूरी है।

अवसर
मौसम विज्ञान से जुड़े पाठय़क्रमों को पूरा करने के बाद नौकरी का ज्यादा बड़ा दायरा सरकारी क्षेत्र में ही है, क्योंकि मौसम-संबंधी सूचना जारी करने का सारा कामकाज सरकारी नियंतण्रमें है। करियर के लिहाज से निजी क्षेत्र में भी अब मौसम विशेषज्ञों को रखा जाने लगा है। निजी क्षेत्र की कुछ कंपनियां अपने स्तर पर मौसम-संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए मौसम विशेषज्ञ को रखती हैं, विशेष रूप से पर्यटन और निर्माण के क्षेत्र की निजी कंपनियां। भारतीय मौसम विभाग में समय-समय पर मौसम की विविध शाखाओं से जुड़ी नियुक्तियों की मांग रहती है। इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करता है। इनमें बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स), एमएससी (भौतिकी/ इलेक्ट्रॉनिक), एमएससी (गणित) के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। इन नियुक्तियों के लिए मौसम विज्ञान से एमएससी करने वाले विद्यार्थी भी आवे दन कर सकते हैं।

Sunday, August 12

संगीत का नाद

पुस्तक समीक्षा/ दीपक राजा


संगीत, नृत्य और कला हमारी सांस्कृतिक विरासत का सबसे बड़ा स्रोत माने जाते हैं। अतः इन विधाओं को व्यावहारिक और सैद्घांतिक रूप में संरक्षित करना हम सबका दायित्य है। इस कड़ी में डॉ. लक्ष्मीनारायण गर्ग ने 'संगीत निबंध सागर' पुस्तक के माध्यम से गायन, वादन और नृत्य के इतिहास और वर्तमान परिवेश को जिस तरह सहेजा है, वह सराहनीय है। पुस्तक संगीत संदर्भित ४७ लेखों का संग्रह है। लेखक ने पुस्तक के प्रारंभ में स्पष्ट लिखा है, 'निबंध निहायत निजी लेख होता है, इसीलिए आवश्यक नहीं है कि दूसरों की विचारधारा से वह मेल खाए।' सच यह भी है कि निबंध हो या लेख, वह हमें विचारों से बांधता नहीं है बल्कि हमारे चिंतन को एक दिशा देता है ताकि नई सोच और नई खोज पल्लवित हो सके।

फिल्मों का सुगम संगीत देखने-सुनने में हर किसी को रसमग्न कर देता है। दृश्य और श्रव्य में संतुलन बिठाते हुए ऐसे किसी गीत को प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को समझना हो तो इसे आलोच्य पुस्तक के 'भारतीय फिल्म संगीत और 'संगीत निर्देशन और उसकी कला नामक निबंधों को पढ़कर समझा जा सकता है। आलोच्य निबंध में लेखक ने न केवल फिल्म में काम करने वाले संगीतकारों के दायित्वों से लेकर उसकी भूमिका पर चर्चा की है, बल्कि नाटक, कोरस, आर्केस्ट्रा आदि में भी संगीतकारों की महत्ता को सरल शब्दों में पाठकों को समझाने का प्रयास किया है। 'सत्य, सौंदर्य और संगीत शीर्षक निबंध में लेखक ने 'शब्द और 'संगीत की अभिव्यक्ति को सरल शब्दों में समझाने का प्रयास किया है। गीत साहित्य का सृजन है, वाद्य स्वर का और नृत्य कला का। यानी गीत, वाद्य और नृत्य का सम्मिलित रूप संगीत है, जो जीवन, संस्कृति और विश्व का प्रतीक है। 'साकार संगीत, 'भक्ति संगीत ऐसे अध्याय हैं जिनको पढ़ना और समझना अपने आप में रुचिकर और ज्ञानवर्धक होगा।

भाषा की अपेक्षा नाद का प्रभाव क्षेत्र अधिक व्यापक है। तभी तो वाद्यों की भांति तराना को भी चार भागों में बांटा गया है। चाहे भारतीय संगीत की बात हो या संगीत शिक्षा, संगीत कथा की बात हो या फिर गजल का विकास, इस पुस्तक में इन सबकी यथोचित जानकारी सुधी पाठकों को मिलती है। भैरव, ध्रुपद गायकी, लोक संगीत, जयदेवकृत गीतगोविंद, नंदिकेश्वर कृत अभिनय दर्पण ऐसे लेख हैं जो संगीत की बारीकियों को समझने के लिए प्रेरित करते हैं। 'संगीत कला की सच्ची उपासक ये वेश्याएं', 'एशियाई नाट्‌य की उत्पत्ति और उसका ऐतिहासिक विकास', 'उत्तर भारतीय संगीत का संक्षिप्त इतिहास' जैसे निबंधों में संगीत का ही नहीं, भारतीय सांस्कृतिक इतिहास का भी सुंदर परिचय मिलता है।

आलोच्य पुस्तक निश्चित ही डॉ. लक्ष्मीनारायण गर्ग के गहरे अध्ययन का प्रतिफल है। चाहे उत्तर और दक्षिण भारत के संगीत का इतिहास हो या फिर रवीन्द्र, नज़रुल या फिर पंजाब का गुरमति संगीत, इसमें मात्रा, काष्ठ, मुहूर्त, प्रहर, दिनरात, पक्ष, मास, ऋतु, अयन और वर्ष में विभक्त किए गए काल की जानकारी अहम है। तबले के सफर की बात हो या आर्केस्ट्रा की धूम सब इस पुस्तक के अध्यायों में विद्यमान है। भारत में संगीत और नृत्य की पुरातन समृद्घ परम्परा रही है। ऐसे में भारतीय नृत्यनाटिका, नाटय और नृत्य, लोक नृत्य, अभिनय कला, शास्त्रीय नृत्य पर आधारित लेख संगीत प्रेमियों को खास रस से आप्लावित करते हैं।

इसमें कोई संदेह नहीं कि जिस तरह काव्य सृजन के समय कवि भाव और चिंतन सागर में डूब जाता है, ठीक यही दशा एक चित्रकार और संगीतकार की भी होती है। लेखक को भी इस पुस्तक के लेखों को लिखने के दौरान ऐसी ही अनुभूति हुई लगती है। पुस्तक के अध्ययन के दौरान यह साफ झलकता है। पुस्तक पढ़ने के दौरान लगता है कि संगीत संबंधी एक ही जानकारी कई लेखों में दी गई है। इसका कारण माना जा सकता है पुस्तक का निबंधों के रूप में प्रस्तुत होना। शीर्षक के अनुरूप किसी भी निबंध के सारे पक्षों को प्रभावशाली ढंग से एक साथ समेटना होता है और संगीत विधा में क्योंकि वादन, गायन और नृत्य का  न्योन्याश्रित संबंध है इसलिए निबंधों में जानकारियों का दोहराव स्वाभाविक है। फिर भी पाठकों को पुस्तक पढ़ने के दौरान यह दोहराव उबाऊ नहीं लगता। अंत में, अपनी संस्कृति और विरासत से लगाव रखने वाले जो कलानुरागी लिखित रूप में अपनी सांगीतिक विरासत को संकलित करना चाहते हैं, उनके संकलन में इस पुस्तक की उपस्थिति अनिवार्य है।

Friday, February 3

'देश राग" नाम से देशभक्ति संगीत प्रतियोगिता का आयोजन

'देश राग" नाम से देशभक्ति संगीत प्रतियोगिता का आयोजन
  • रिकॉर्डेड कृति को ऑनलाइन जमा कराने की आखिरी तारिख 28 फरवरी 2012
  • चयनित पांच कलाकारों की कृति को एक एलबम का रूप दिया जाएगा
  • देशराग के विजयी कलाकार का लाइव परफॉर्म भारत-पाकिस्तान सीमा बाघा बोर्डर पर
लोक सेवा संचार परिषद् द्वारा निर्मित आैर दूरदर्शन द्वारा प्रचारित 1988 में बने 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' गीत ने पूरे भारत देश को एक तार में बांध दिया था। देश के हर कोने में इस गीत की गूंज थी क्योंकि इसमें चौदह भारतीय भाषाओं का प्रयोग किया गया था। वह गीत आज भी कभी दूरदर्शन पर प्रसारित होता है तो मन प्रसन्न हो जाता है।
भारत अब एक आजाद मुल्क है आैर इसलिए अब वतनपरस्ती के मायने बदल चुके हैं। आज गुलामी हमारी समस्या नहीं है लेकिन आज भी हम बहुत सी समस्याओं से घिरे हुए हैं, जिससे पार पाने के लिए रोज संघर्षरत हैं। संघर्षरत रहने के लिए जोश आैर उत्साह बनाए रखने में गीत संगीत का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। देश को आज भी बहुत से 'मिले सुर मेरा तुम्हारा", 'वंदे मातरम" सरीखे देशभक्ति गीतों की जरूरत है।
ऐसे ही देशभक्ति गीत आैर संगीत की खोज के लिए रक्षक फाउंडेशन 'देश राग" नाम से देशभक्ति संगीत प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है। इस प्रतियोगिता की साहित्य सहयोगी संस्था कविता कोष है।
देश राग प्रतियोगिता के माध्यम से विश्वभर के भारतीय कलाकारों को आमंत्रित कर रहा है कि वे अपने संगीत साधना से देशभक्ति का एक ऐसा गीत रचें जो भारतीय जनमानस को छू जाए आैर उन्हें देश के लिए कुछ कर गुजरने को प्रेरित करें।
इस प्रतियोगिता में आपको पूरा गीत भेजना होगा जिसमें लेखन, संगीत आैर गायन सभी कुछ प्रतियोगी को ही करना है।
यानि देशभक्ति पर आधारित स्वलिखित गीत को खुद की बनाई धुन पर वाद्ययंत्रों के साथ अपनी ही आवाज में गायन करना है। इसमें व्यक्तिगत तौर पर या बैंड (कई कलाकारों के समूह) के तौर पर हिस्सा लिया जा सकता है।
प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक व्यक्तिगत गीतकार, गायक या संगीतकार प्रतियोगिता के नौर्म को पूरा करने के लिए कई कलाकारों के समूह यानि बैंड बनाकर भाग ले सकते हैं।
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करने आैर अपनी रिकॉर्डेड कृति को ऑनलाइन जमा कराने की आखिरी तारिख 28 फरवरी 2012 है। इसके बाद एक मार्च से 15 मार्च तक के बीच ऑनलाइन जमा कराए गए रिकॉर्डेड कृति पर निर्णायक मंडल विचार करेंगे। निर्णायक मंडल द्वारा चुने गए अंतिम पांच कृति के कलाकारों की घोषणा 15 मार्च को वेबसाइट पर की जाएगी आैर घोषित कलाकारों को इसकी सूचना व्यक्तिगत तौर पर दी जाएगी।
चयनित पांच कलाकारों की कृति को एक एलबम का रूप दिया जाएगा। इसके लिए 16 मार्च से 31 मार्च के बीच रिकॉर्डिंग टाइम स्लॉट निर्धारित किया जाएगा। एलबम तैयार होने के बाद पांच अप्रैल 2012 को अंतिम पांच प्रतिभागियो में देशराग के विजयी कलाकारों की घोषणा की जाएगी। विजयी कलाकार का लाइव परफॉर्म भारत-पाकिस्तान सीमा बाघा बोर्डर पर किया जाएगा। इस परफार्म में जाने माने कलाकार देशराग के विजयी कलाकार के साथ सुर में सुर मिलाएंगे।
अधिक जानकारी के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट देशराग डॉट ओआरजी वेबसाइट को खंगाला जा सकता है।
  • रिकॉर्डेड कृति को ऑनलाइन जमा कराने की आखिरी तारिख 28 फरवरी 2012
  • चयनित पांच कलाकारों की कृति को एक एलबम का रूप दिया जाएगा
  • देशराग के विजयी कलाकार का लाइव परफॉर्म भारत-पाकिस्तान सीमा बाघा बोर्डर पर
लोक सेवा संचार परिषद् द्वारा निर्मित आैर दूरदर्शन द्वारा प्रचारित 1988 में बने 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' गीत ने पूरे भारत देश को एक तार में बांध दिया था। देश के हर कोने में इस गीत की गूंज थी क्योंकि इसमें चौदह भारतीय भाषाओं का प्रयोग किया गया था। वह गीत आज भी कभी दूरदर्शन पर प्रसारित होता है तो मन प्रसन्न हो जाता है।
भारत अब एक आजाद मुल्क है आैर इसलिए अब वतनपरस्ती के मायने बदल चुके हैं। आज गुलामी हमारी समस्या नहीं है लेकिन आज भी हम बहुत सी समस्याओं से घिरे हुए हैं, जिससे पार पाने के लिए रोज संघर्षरत हैं। संघर्षरत रहने के लिए जोश आैर उत्साह बनाए रखने में गीत संगीत का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। देश को आज भी बहुत से 'मिले सुर मेरा तुम्हारा", 'वंदे मातरम" सरीखे देशभक्ति गीतों की जरूरत है।
ऐसे ही देशभक्ति गीत आैर संगीत की खोज के लिए रक्षक फाउंडेशन 'देश राग" नाम से देशभक्ति संगीत प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है। इस प्रतियोगिता की साहित्य सहयोगी संस्था कविता कोष है।
देश राग प्रतियोगिता के माध्यम से विश्वभर के भारतीय कलाकारों को आमंत्रित कर रहा है कि वे अपने संगीत साधना से देशभक्ति का एक ऐसा गीत रचें जो भारतीय जनमानस को छू जाए आैर उन्हें देश के लिए कुछ कर गुजरने को प्रेरित करें।
इस प्रतियोगिता में आपको पूरा गीत भेजना होगा जिसमें लेखन, संगीत आैर गायन सभी कुछ प्रतियोगी को ही करना है।
यानि देशभक्ति पर आधारित स्वलिखित गीत को खुद की बनाई धुन पर वाद्ययंत्रों के साथ अपनी ही आवाज में गायन करना है। इसमें व्यक्तिगत तौर पर या बैंड (कई कलाकारों के समूह) के तौर पर हिस्सा लिया जा सकता है।
प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक व्यक्तिगत गीतकार, गायक या संगीतकार प्रतियोगिता के नौर्म को पूरा करने के लिए कई कलाकारों के समूह यानि बैंड बनाकर भाग ले सकते हैं।
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करने आैर अपनी रिकॉर्डेड कृति को ऑनलाइन जमा कराने की आखिरी तारिख 28 फरवरी 2012 है। इसके बाद एक मार्च से 15 मार्च तक के बीच ऑनलाइन जमा कराए गए रिकॉर्डेड कृति पर निर्णायक मंडल विचार करेंगे। निर्णायक मंडल द्वारा चुने गए अंतिम पांच कृति के कलाकारों की घोषणा 15 मार्च को वेबसाइट पर की जाएगी आैर घोषित कलाकारों को इसकी सूचना व्यक्तिगत तौर पर दी जाएगी।
चयनित पांच कलाकारों की कृति को एक एलबम का रूप दिया जाएगा। इसके लिए 16 मार्च से 31 मार्च के बीच रिकॉर्डिंग टाइम स्लॉट निर्धारित किया जाएगा। एलबम तैयार होने के बाद पांच अप्रैल 2012 को अंतिम पांच प्रतिभागियो में देशराग के विजयी कलाकारों की घोषणा की जाएगी। विजयी कलाकार का लाइव परफॉर्म भारत-पाकिस्तान सीमा बाघा बोर्डर पर किया जाएगा। इस परफार्म में जाने माने कलाकार देशराग के विजयी कलाकार के साथ सुर में सुर मिलाएंगे।
अधिक जानकारी के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट देशराग डॉट ओआरजी वेबसाइट को खंगाला जा सकता है।

Monday, January 9

दीपक राजा को गौरव गाथा पुरस्कार

पत्रकार दीपक “राजा” को गौरव गाथा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित गैर सरकारी संस्था रक्षक फाउंडेशन ने उनकी कविता “पूछ रहा है देश का बचपन” के लिए प्रदान किया है। रक्षक फाउंडेशन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशभक्ति पर आधारित काव्य प्रतियोगिता “गौरव गाथा” के नाम से आयोजित की। प्रतियोगिता भारतीय, प्रवासी भारतीय आैर भारतीय मूल के लोगों के लिए आयोजित था। प्रतियोगिता की साहित्य सहयोगी संस्था “कविता कोश” है।रक्षक फाउंडेशन प्रति वर्ष यह प्रतियोगिता देशभक्ति पर आधारित “गौरव गाथा” के नाम से आयोजित करता है। वर्ष 2011 के गौरव गाथा प्रतियोगिता में 173 कविताओं को शामिल किया गया था। चयनकर्ताओं ने दीपक राजा की कविता ‘पूछ रहा है देश का बचपन के लिए’ गौरव गाथा पुरस्कार से सम्मानित किया है।पत्रकार दीपक राजा ने वर्ष 2006 में मुम्बई में लोकल ट्रेनों में हुए बम धमाकों से व्यथित होकर पूछ रहा है देश का बचपन/ राह दिखाने वालों से/ दशा देश की ऐसी क्यूं/ क्यों हो, तुम मतवाले से? कविता की रचना की।




परिचय : दीपक कुमार उर्फ राजा का बचपन नक्सल प्रभावित जमुई जनपद के केशोपुर कस्बे में गुजरा। बिहार दसवीं बोर्ड की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए वैद्यनाथधाम देवघर, पटना फिर देश की राजधानी दिल्ली पहुंचे। दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद कई क्षेत्रीय अखबारों से जुड़े रहे। वर्तमान में राष्ट्रीय सहारा हिन्दी दैनिक दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कविता लेखन की रूचि उन्हें बचपन से है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पत्रकारिता की पढ़ाई करने के दौरान उनकी कविता को पहली बार मान्यता मिली। हिन्दी अकादमी दिल्ली के तत्वावधान में कॉलेज स्तरीय आशुलेखन प्रतियोगिता में “नदी के प्रदूषण” विषय पर “नदी -मेरी मां” कविता पर उन्हें सांत्वना पुरस्कार मिला। “तेरे बरख्श जिंदगी” के नाम से कविता पांडुलिपी हिन्दी अकादमी दिल्ली के पास विचाराधीन है।

Sunday, December 11

एक पेड़ ऐसा जिस पर फले रूपए

हर आदमी, चाहे वो जहाँ भी है और जिस हालत में है, जीवन यापन कर रहा है। हर एक व्यक्ति अपनी स्थितियों और परिस्थितियों को अपने अनुसार बनाना चाहता है। उनके लिए जो कुछ बन पा रहा है, करने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि जितना सोच पाते हैं, उतना नहीं मिल पाता है।

एक मंच ऐसा मुझे दिखा है जहाँ से हर आदमी अपने जरुरत और इच्छा के मुताबिक अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है। अपने साथ साथ परिवार में आने वाली पीढ़ियों के लिए भी रुपये का पेड़ छोड़ सकता है। पेड़ तो एक साल में एक बार फल देता है, लेकिन मैं जिस पेड़ कि बात कर रहा हूँ वो साल में के बार नहीं पूरे बावन हफ्ते रुपये का फल दे सकता है।

उस फल को पाने के लिए बस एक बार पेड़ का बीज खरीदना पड़ेगा। बीज को खरीदने के बाद बीज को पौधा बनाने तक ध्यान देना पड़ेगा। बीज एक बार पौधा बन जाये, फिर तो फलदार बनने से कोई नहीं रोक सकता है।

रूपये के पेड़ का बीज खरीदने के लिए आपको सेक्योर लाइफ नाम के नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी के साथ जुडी कंपनियों का कोई एक प्रोडक्ट जो आपके लिए उपयोगी हो, खरीदना होगा। इसके साथ ही बीज आपके हाथ में आ जायेगा। प्रोडक्ट क्या है, इसे देखने के लिए आप वेब
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